आंतरिक सुरक्षा पर सतर्कता जरूरी

नेपाल के रास्ते भारत में तीन जैश-ए-मोहम्मद से जुड़े आतंकवादियों के घुस आने की खबर ने एक बार फिर यह याद दिला दिया है कि आंतरिक सुरक्षा को लेकर हमें कभी भी ढिलाई नहीं बरतनी चाहिए. बिहार पुलिस मुख्यालय ने इस बाबत बड़ा अलर्ट जारी किया है और सीमावर्ती जिलों में विशेष निगरानी बढ़ा दी गई है. इन तीन आतंकवादियों—हसनैन अली, आदिल हुसैन और मोहम्मद उस्मान—की तस्वीरें और पासपोर्ट से संबंधित जानकारी सार्वजनिक कर दी गई है, ताकि आम लोग भी सतर्क रहें और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत पुलिस तक पहुंचा सकें.

भारत में अगले दो महीने त्योहारों और आयोजनों से भरे हुए हैं. गणेशोत्सव, दुर्गापूजा, दशहरा, दीपावली से लेकर छठ महापर्व तक लाखों की संख्या में लोग सडक़ों और पूजा पंडालों में एकत्रित होंगे. ऐसे समय में किसी भी आतंकी साजिश का खतरा गंभीर हो सकता है. बिहार जैसे राज्य में यह खतरा और भी ज्यादा है, क्योंकि नवंबर में वहां विधानसभा चुनाव भी होने वाले हैं. चुनावी रैलियां और भीड़भाड़ वाले कार्यक्रम आतंकियों के लिए संभावित निशाना हो सकते हैं.

इस पृष्ठभूमि में बिहार पुलिस और केंद्रीय सुरक्षा एजेंसियों का कदम सराहनीय है कि उन्होंने समय रहते अलर्ट जारी किया और खोजी अभियान शुरू किया, लेकिन केवल बिहार ही नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश, झारखंड, बंगाल और दिल्ली जैसे राज्यों को भी पूरी तरह सतर्क रहना होगा. नेपाल-भारत सीमा खुली हुई है और इसका फायदा पाकिस्तान प्रायोजित आतंकी संगठन लंबे समय से उठाते रहे हैं.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार की आंतरिक सुरक्षा नीति की एक बड़ी खासियत यह रही है कि पिछले 11 वर्षों में जम्मू-कश्मीर को छोडक़र देश के किसी भी हिस्से में बड़ी आतंकी घटना नहीं हुई है. चाहे यह खुफिया एजेंसियों की बेहतर समन्वय व्यवस्था हो, या सुरक्षा तंत्र का आधुनिकीकरण, मोदी सरकार ने हर स्तर पर आतंकवाद को काबू में रखने में सफलता हासिल की है. जिस भारत में कभी दिल्ली, मुंबई, अहमदाबाद जैसे शहरों में सिलसिलेवार बम धमाकों की खबरें आती थीं, वहां अब दशकों में गिनती की घटनाएं भी नहीं होती. यह उपलब्धि मामूली नहीं है और इसका श्रेय राजनीतिक इच्छाशक्ति और मजबूत सुरक्षा ढांचे को जाता है.

हालांकि, खतरा अभी भी पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है. आतंकवादी संगठनों की कोशिश रहती है कि भारत के त्योहारों, चुनावों या भीड़भाड़ वाले आयोजनों को निशाना बनाकर देश में अस्थिरता फैलाई जाए. ऐसे में ज़रूरी है कि सुरक्षा एजेंसियां अपने अलर्ट मोड को बनाए रखें और नागरिक भी सजग रहें. सरकार को भी सीमा प्रबंधन पर और अधिक ध्यान देना होगा ताकि नेपाल, बांग्लादेश या म्यांमार जैसे रास्तों से घुसपैठ की संभावना न्यूनतम हो सके.

भारत की एकता और लोकतांत्रिक शक्ति को आतंकवादी कभी कमजोर नहीं कर सकते. लेकिन यह तभी संभव है जब सरकार, सुरक्षा तंत्र और आम जनता तीनों मिलकर चौकसी बरतें. बिहार से आया यह अलर्ट पूरे देश के लिए चेतावनी है कि सतर्क रहना ही सुरक्षा की पहली शर्त है. यह संतोषजनक है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार आंतरिक सुरक्षा के मामले में हमेशा अलर्ट पर रहती है, लेकिन पहलगाम घटना के बाद हमें और अधिक सतर्कता रखनी होगी. खासतौर पर त्यौहारों के सीजन को देखते हुए.

 

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