महू के आर्मी वार कॉलेज में शुरू हुए ‘रण संवाद-2025’ ने भारतीय रक्षा चिंतन को नई दिशा दी है. इस दो दिवसीय कार्यक्रम में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और सीडीएस जनरल अनिल चौहान के भाषणों ने स्पष्ट कर दिया कि भारत आने वाले दशकों में केवल परंपरागत रक्षा पर ही नहीं, बल्कि तकनीकी रूप से भविष्य के युद्ध की चुनौतियों के लिए भी तैयार हो रहा है. यह आयोजन न केवल सेनाओं को नई रणनीतिक सोच से जोडऩे का माध्यम है, बल्कि आत्मनिर्भर भारत अभियान का व्यावहारिक स्वरूप भी सामने लाता है.
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने अपने संबोधन में दो महत्वपूर्ण संदेश दिए. पहला, भारत की रक्षा नीति हमेशा शांति-प्रधान रही है. महाभारत का उदाहरण देते हुए उन्होंने याद दिलाया कि युद्ध से पहले श्रीकृष्ण ने शांति का प्रस्ताव रखा था. लेकिन जब चुनौती दी गई, तो पांडवों ने निर्णायक युद्ध लड़ा. यही भारत की आत्मा है,युद्ध न शुरू करना, लेकिन चुनौती मिलने पर पूरी ताकत से उसका जवाब देना.
दूसरा, उन्होंने भविष्य की लड़ाई के नए आयामों पर प्रकाश डाला.भूमि, वायु और जल तक सीमित युद्ध अब अंतरिक्ष और साइबर स्पेस में भी फैल चुके हैं. उपग्रह आधारित प्रणालियां, एंटी-सैटेलाइट हथियार और इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर हमारी सुरक्षा का नया आधार बन रहे हैं. रक्षा मंत्री ने सशस्त्र बलों को पांच साल तक चल सकने वाली लंबी लड़ाई के लिए भी तैयार रहने का संदेश दिया.
भारत का रक्षा उत्पादन 1.5 लाख करोड़ रुपये को पार कर चुका है. यह आत्मनिर्भर भारत की बड़ी उपलब्धि है. ‘ऑपरेशन सिंदूर’ को उन्होंने इसका प्रमाण बताया,जहां स्वदेशी हथियार प्रणालियों ने सफलता दिलाई. आज के युद्ध में केवल ताकतवर टैंक या तेज लड़ाकू विमान ही नहीं, बल्कि एआई संचालित ड्रोन, साइबर क्षमता और क्वांटम तकनीक निर्णायक भूमिका निभाएंगे.
यही बात सीडीएस जनरल अनिल चौहान ने भी रेखांकित की. उन्होंने कहा कि युद्ध में केवल शस्त्र नहीं, बल्कि शास्त्र यानी रणनीति और ज्ञान भी उतना ही आवश्यक है. महाभारत का उदाहरण देकर उन्होंने स्पष्ट किया कि अर्जुन जैसे योद्धा को भी विजय श्रीकृष्ण के मार्गदर्शन से मिली.रण संवाद के दौरान मिले संदेशों से स्पष्ट हैं कि तकनीक को अपनाने वाला ही विजेता होगा. सीडीएस चौहान ने कौटिल्य का उल्लेख करते हुए कहा कि युद्ध में शक्ति, उत्साह और युक्ति तीनों का संगम होना चाहिए.इसी दृष्टि से भारत अपनी सेनाओं को संयुक्त प्रशिक्षण, एआई-आधारित हथियारों, साइबर सुरक्षा और इलेक्ट्रॉनिक वार फेयर की दिशा में आगे बढ़ा रहा है.
उन्होंने ऋग्वेद का हवाला देकर कहा कि हर दिशा से आने वाले विचारों और सुझावों को आत्मसात करना चाहिए . स्पष्ट है कि भारत केवल वर्तमान चुनौतियों का सामना नहीं कर रहा, बल्कि 10-15 साल आगे की सुरक्षा चुनौतियों का रोड मैप भी बना रहा है.
रण संवाद की एक और विशेषता यह रही कि इसमें न केवल तीनों सेनाओं के 450 से अधिक अधिकारी शामिल हुए, बल्कि ऑस्ट्रेलिया और मिस्र जैसे देशों के प्रतिनिधियों ने भी भाग लिया. इससे यह संदेश जाता है कि भारत की सुरक्षा नीति केवल आत्मनिर्भरता तक सीमित नहीं, बल्कि मित्र देशों के साथ साझेदारी और वैश्विक सहयोग पर भी आधारित है. महू का रण संवाद वास्तव में भारत की सुरक्षा नीति का नया घोषणापत्र है. इसमें शांति और शक्ति का संतुलन है, तकनीक और परंपरा का संगम है और आत्मनिर्भरता के साथ वैश्विक सहयोग की दृष्टि भी है. आज जब भू-राजनीतिक परिदृश्य अनिश्चित है, तब भारत का यह संदेश अत्यंत प्रासंगिक है,शांति चाहते हो, तो युद्ध के लिए तैयार रहो.
