
निकुंज माहेश्वरी नलखेड़ा। नगर के मध्य गौरी पुत्र गणेश रिद्धि-सिद्धि के दाता की अत्यंत प्राचीन एवं विशाल मूर्ति विराजमान है. पुरातत्ववेत्ताओं के अनुसार यह मूर्ति लगभग पांच सौ वर्ष से अधिक प्राचीन होकर गोबर से बनी हुई है. गोबर की यह मूर्ति श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र है. मान्यता है कि यहां भक्तों की हर मनोकामना पूर्ण होती है.
नगर में गणेश दरवाजे के नाम से जाना जाने वाला चौराहा, जो कभी नगर का मुख्य प्रवेश द्वार था. यहां गणेश दरवाजे पर स्थित भगवान श्री गणेश की विशालकाय मूर्ति की स्थापना किसने की, इसका उल्लेख तो कहीं नहीं मिलता, लेकिन प्रसिद्ध पुरातत्वविद् नलखेड़ा आए थे, तब उन्होंने इस मूर्ति को पांच सौ वर्ष से अधिक प्राचीन बताते हुए इसे गोबर से बनी हुई बताया था. मूर्ति लगभग दस फीट ऊंची है. उक्त मंदिर को प्रदेश सरकार के पर्यटन विभाग द्वारा पूर्व में धार्मिक पर्यटन स्थल में शामिल किया गया है. इसके तहत मंदिर में अनेक विकास कार्य भी कराए गए हैं.
चारों दिशाओं में चार दरवाजे
सैकड़ों वर्ष पूर्व नलखेड़ा नगर गांव के रूप में पूर्व दिशा में दो किमी दूर श्री बल्डावदा हनुमान की पहाड़ी पर बसा था. प्राकृतिक आपदा के कारण उस वक्त का नलखेड़ा गांव जमींदोज हो गया. इसके बाद ग्वालियर रियासत के तत्कालीन महाराजा माधवराव सिंधिया के एक मराठा सुबेदार मोतीवाले ने नलखेड़ा नगर को नया स्वरुप दिया. नगर की सुरक्षा के लिए चारों ओर ऊंची दीवारों का परकोटा बनाया गया. चार दिशाओं में चार दरवाजे भी बनाए गए, जिनके अवशेष आज भी हैं. इनमें से गणेश दरवाजा एवं सती दरवाजा आज भी प्रचलित हैं.
गणपति जी की विशालमूर्ति स्थापित की…
एक दरवाजे के मुहाने पर गणपति जी की विशाल मूर्ति स्थापित की गई थी. इसी कारण इसका नाम गणेश दरवाजा रखा गया. नलखेड़ा नगर के धार्मिक इतिहास में कहा जाता है कि जिस नगर के मुख्य द्वार पर भगवान श्री गणेश व दाहिने हाथ पर मां जगदंबा विराजमान हो, वहां कोई आपदाएं नहीं आती हैं. इस मूर्ति के साथ आसपास रिद्धि-सिद्धि की मूर्तियां हैं. इस मंदिर को शासन से प्राप्त राशि से नया स्वरुप प्रदान किया गया है. इसमें गणेश मूर्ति के नीचे कमल के फूल का निर्माण करवाया गया है. साथ ही मंदिर में आकर्षक विद्युत साज-सज्जा की व्यवस्था के साथ गर्भगृह को भी बड़ा किया गया है.
शुभ कार्य में दिया जाता है निमंत्रण…
यहां दर्शन के लिए आए श्रद्धालुओं ने बताया कि नगर सहित आसपास के हिन्दू परिवारों में शादी विवाह के साथ अन्य कोई शुभ कार्य आता है, तो सर्वप्रथम भगवान बड़े गणपति जी को ही निमंत्रण पत्र देकर विनती की जाती है कि उनका वह कार्य विघ्नहर्ता श्री गणेशजी की कृपा से निर्विघ्न रूप से संपन्न हो जाए. इसी तरह नवदंपति भी अपने सफल वैवाहिक जीवन की मंगलकामना को लेकर भगवान श्री गणेश का आशीर्वाद प्राप्त करने आते हैं.
