नयी दिल्ली 26 अगस्त (वार्ता) रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने नौसेना को देश की समुद्री ताकत का प्रतीक बताते हुए कहा है कि भारत आक्रामक विस्तारवाद में विश्वास नहीं करता लेकिन इसका यह मतलब नहीं है कि देश हमारा नुकसान करने वालों के सामने झुक जायेगा।
श्री सिंह ने मंगलवार को विशाखापत्तनम में दो स्वदेशी अत्याधुनिक युद्धपोतों आईएनएस उदयगिरि और आईएनएस हिमगिरि को नौसेना के बेड़े में शामिल किये जाने के मौके पर कहा कि नौसेना भारत की समुद्री शक्ति का प्रतीक है क्योंकि यह अरब सागर से लेकर मध्य पूर्व और पूर्वी अफ्रीकी समुद्र तट तक देश के हितों की रक्षा कर रही है। उन्होंने कहा, “ भू-रणनीतिक स्थिति ऐसी है कि यह हमारे आर्थिक विकास को सीधे प्रभावित करने की क्षमता रखती है। हमारी ऊर्जा आवश्यकताएँ, तेल और प्राकृतिक गैस काफी हद तक इस क्षेत्र की सुरक्षा पर निर्भर करती हैं। हमारी नौसेना हमारी राष्ट्रीय आर्थिक सुरक्षा का एक प्रमुख स्तंभ बनकर उभरी है।”
ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारतीय नौसेना की त्वरित योजना और क्रियान्वयन की सराहना करते हुए उन्होंने कहा, “ दुश्मन हमारी नौसेना की ताकत और और उसकी क्षमताओं को समझते हैं। ” उन्होंने ऑपरेशन के दौरान तीनों सेनाओं और अन्य सुरक्षा एजेंसियों तथा विभागों के बीच सहज तालमेल को इस बात का प्रमाण बताया कि राष्ट्र हर चुनौती का सामना एकजुट होकर करता है और उसका प्रभावी ढंग से सामना करता है।
रक्षा मंत्री ने जोर देकर कहा कि भारत विस्तारवाद में विश्वास नहीं करता लेकिन दुश्मन को जवाब देना भलीभांति जानता है। उन्होंने कहा कि भारत आक्रामक विस्तारवाद में विश्वास नहीं करता। हम कभी किसी देश पर हमला नहीं करते या किसी को उकसाते नहीं हैं। लेकिन, इसका मतलब यह नहीं है कि हम उन लोगों के सामने झुक जाएँ जो हमें नुकसान पहुँचाना चाहते हैं। जब हमारी सुरक्षा को खतरा होता है, तो हम जानते हैं कि कैसे जवाब देना है।
रक्षा मंत्री ने कहा, “ हम मुंहतोड़ जवाब देना जानते हैं। पहलगाम में निर्दोष नागरिक मारे गए। हमने ऑपरेशन सिंदूर के माध्यम से एक प्रभावी, संतुलित और सटीक जवाब दिया। हमने आतंकवादी ठिकानों को नष्ट करने का संकल्प लिया और अपने लक्ष्यों को सफलतापूर्वक प्राप्त किया। मैं दोहराना चाहता हूँ कि ऑपरेशन समाप्त नहीं हुआ है, यह केवल एक विराम है। आज पूरा देश प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में आतंकवाद के विरुद्ध एकजुट है और यही राष्ट्रीय एकता, अनुशासन, त्याग और समर्पण हमारी असली ताकत है।”
श्री सिंह ने ज़ोर देकर कहा कि आईएनएस उदयगिरि और आईएनएस हिमगिरि न केवल नौसेना की युद्ध क्षमता को मज़बूत करेंगे बल्कि हिंद महासागर क्षेत्र में एक ‘प्रथम प्रतिक्रियाकर्ता’ और ‘वरीय सुरक्षा भागीदार’ के रूप में इसकी भूमिका को भी सुदृढ़ करेगा। उन्होंने कहा, ‘समुद्री डकैती से निपटने से लेकर तस्करी और अवैध तस्करी के ख़िलाफ़ लड़ाई, समुद्री आतंकवाद पर अंकुश लगाने या प्राकृतिक आपदा के बाद राहत प्रदान करने तक, ये युद्धपोत जटिल और जोखिम भरे अभियानों में निर्णायक साबित होंगे।”
