श्रीनगर, 25 अगस्त (वार्ता) पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) प्रमुख महबूबा मुफ्ती ने सोमवार को जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला से कश्मीरी कैदियों की रिहाई और केंद्र शासित प्रदेश के बाहर की जेलों में बंद कैदियों को वापस लाने का मुद्दा केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के समक्ष उठाने का आग्रह किया।
जम्मू-कश्मीर और देश के विभिन्न जेलों में बंद कैदियों के लिए पीडीपी की ओर से आयोजित विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व करने के बाद सुश्री मुफ्ती ने यह टिप्पणी की।
हाथों में तख्तियां लिए और “जेल नहीं, ज़मानत चाहिए” के नारे लगाते हुए पीडीपी प्रदर्शनकारियों ने पार्टी मुख्यालय से लाल चौक तक मार्च निकालने की कोशिश की। लेकिन पहले से तैनात भारी पुलिस बल ने उन्हें रोक दिया। कार्यकर्ताओं ने सत्तारूढ़ नेशनल कॉन्फ्रेंस सरकार के खिलाफ भी नारे लगाए।
सुश्री मुफ्ती ने पार्टी कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए ज़ोर देकर कहा कि इस विरोध प्रदर्शन का “राजनीतिक नहीं, बल्कि एक मानवीय मुद्दा है।” उन्होंने कहा, “हम यहां जम्मू-कश्मीर और बाहर की विभिन्न जेलों में बंद हजारों कैदियों के लिए इकट्ठा हुए हैं। उनमें से कई निर्दोष हैं।” मैं उमर साहब से अपील करती हूं कि वे इस मुद्दे को गृह मंत्री साहब के समक्ष उठाएं ताकि निर्दोष लोगों को जेलों से रिहा किया जा सके।
उन्होंने कहा कि अगर मुख्यमंत्री ऐसा नहीं कर सकते, तो कम से कम जम्मू-कश्मीर के बाहर की जेलों में बंद लोगों को वापस लाया जाना चाहिए। महबूबा ने आरोप लगाया कि ज़्यादातर बंदियों के परिवार आर्थिक तंगी के कारण कानूनी लड़ाई नहीं लड़ पाते। उन्होंने कहा, “चाहे हमारे नेता हों, जमात-ए-इस्लामी के बुज़ुर्ग हों, शब्बीर शाह हों या कोई और – जब वे गंभीर बीमारियों से ग्रस्त होते हैं, तो उनके परिवारों को इलाज के लिए जी-तोड़ मेहनत करनी पड़ती है।”
उन्होंने पूछा, “अगर नेताओं का यह हाल है, तो जम्मू-कश्मीर के आम लोगों का क्या होगा? उनकी बीमारियों का इलाज कौन करेगा?”
उन्होंने मुख्यमंत्री से अपील की कि वह गृह मंत्री से मिलें और उनसे कैदियों को जम्मू-कश्मीर वापस लाने का अनुरोध करें ताकि माता-पिता अपने बच्चों से मिल सकें और उनके मामलों का निपटारा हो सके।
पीडीपी प्रमुख की अपील के कुछ घंटों बाद मुख्यमंत्री ने कहा कि यहाँ विरोध प्रदर्शन का कोई नतीजा नहीं निकलेगा। उन्होंने कहा, “हम सभी इस मुद्दे को लेकर चिंतित हैं लेकिन श्रीनगर में ऐसा करने से कुछ हासिल नहीं होगा। जम्मू-कश्मीर के सुरक्षा संबंधी फैसले दिल्ली में लिए जाते हैं। ये फैसले गृह मंत्रालय द्वारा लिए जाते हैं। इसलिए बेहतर होगा कि वे दिल्ली जाकर गृह मंत्री से मिलें।” उन्होंने कहा कि उनकी सरकार पहले ही केंद्र के समक्ष कैदियों के बारे में अपनी चिंताएँ व्यक्त कर चुकी है।
उन्होंने आगे कहा, “हमने ये बातें दिल्ली में गृह मंत्री के सामने रखीं क्योंकि फ़ैसला वहीं से होना है। अगर हमें सिर्फ़ दिखावे के लिए ऐसा करना है, तो यहीं करें।”
इस बीच हुर्रियत कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष एवं कश्मीर के प्रमुख मौलवी मीरवाइज़ उमर फ़ारूक़ ने जम्मू-कश्मीर के सभी राजनीतिक और सामाजिक समूहों के साथ-साथ नागरिक समाज के सदस्यों से जेलों में बंद कश्मीरी कैदियों की दुर्दशा को उजागर करने के लिए एकजुट होने का आह्वान किया।
मीरवाइज़ ने सोशल मीडिया एक्स पर कहा कि “जम्मू-कश्मीर और पूरे भारत की जेलों में बंद हज़ारों कश्मीरी कैदियों की दुर्दशा को उजागर करना और उनकी राहत व रिहाई के लिए प्रयास करना सभी कश्मीरियों की नैतिक ज़िम्मेदारी है। अगर हम वाकई उनकी मदद करना चाहते हैं, तो इस संबंध में सभी का संयुक्त प्रयास समय की मांग है।”
