नयी दिल्ली, 25 अगस्त (वार्ता) उच्चतम न्यायालय ने महाराष्ट्र पुलिस की ओर से चुनाव विशेषज्ञ एवं सेंटर फॉर द स्टडी ऑफ डेवलपिंग सोसाइटीज (सीएसडीएस) के सह-निदेशक प्रोफेसर संजय कुमार के खिलाफ 2024 के महाराष्ट्र विधानसभा चुनावों का गलत विश्लेषण करने वाले एक ट्वीट को लेकर दर्ज दो प्राथमिकियों की कार्यवाही पर सोमवार को रोक लगा दी।
मुख्य न्यायाधीश बी.आर. गवई और न्यायमूर्ति एन.वी. अंजारिया की पीठ ने प्रो कुमार की प्राथमिकी रद्द करने की मांग वाली रिट याचिका पर नोटिस जारी करते हुए यह अंतरिम आदेश पारित किया।
गत 17 अगस्त को प्रो कुमार ने ‘एक्स’ पर विशिष्ट निर्वाचन क्षेत्रों में मतदाताओं की संख्या में बदलाव के बारे में पोस्ट किया था और विश्लेषण गलत होने का आभास होने पर उन्होंने 19 अगस्त को स्पष्टीकरण और माफ़ी जारी की। इसके बावजूद चुनाव आयोग को रिपोर्ट करने वाले पुलिस अधिकारियों ने एक नासिक में और दूसरी नागपुर में भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 175, 353(1)(बी), 212, 340(1)(2) और 356 के तहत दो प्राथमिकी दर्ज कीं।
प्राथमिकी को चुनौती देते हुए प्रो कुमार ने शीर्ष न्यायालय में तर्क दिया कि आरोप निराधार हैं और “राज्य शक्ति का दुरुपयोग” हैं। अपनी याचिका में उन्होंने कहा , “गलत जानकारी देने वाला ट्वीट जालसाजी जैसे अपराधों के लिए प्राथमिकी का आधार नहीं बन सकता। ये आरोप स्पष्ट रूप से लागू नहीं होते क्योंकि इनमें कोई आपराधिक इरादा नहीं था। यह पोस्ट एक वास्तविक और अनजाने में हुई गलती थी, जिसके लिए सार्वजनिक रूप से माफ़ी मांगी गई थी।”
याचिका में आगे कहा गया है कि चुनाव आयोग से जुड़े अधिकारियों द्वारा दर्ज की गई प्राथमिकी एक प्रतिष्ठित शिक्षाविद को परेशान करने के समान है और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर “घिनौना प्रभाव” डालती है।
यह याचिका एडवोकेट-ऑन-रिकॉर्ड सुमीर सोढ़ी के माध्यम से दायर की गई थी। अब नोटिस जारी होने के बाद मामले की सुनवाई की जाएगी।
