
सुरेश पाण्डेय पन्ना।अजयगढ़ तहसील मुख्यालय से लगभग पांच किलोमीटर करतल मार्ग पर सुंदर रमणीक पुरातात्विक एवं धार्मिक महत्व की के अत्यंत प्राचीन तीर्थ स्थल देव पर्वत की प्राचीन गुफाये ऐतिहासिक हजारों साल पुराने शिव मंदिर एवं अन्यत कलात्मक धार्मिक महत्व के स्थल दिनो दिन जर्जर हो रहे है। इन सब के संरक्षण के लिये जिले का पुरातत्व विभाग जरा भी गंभीर नहीं दिखता देव पर्वत के ऊपरी शिखर पर भगवान राम के आगमन का प्रमाण सीता रसोई कहा जाने वाला विशाल कलात्मक मंदिर दिनों दिन खंडहर मे बदल रहा कभी क्षेत्रीय जनों की विशेष आस्था का केंद्र रहा। सीता रसोई नाम का मंदिर आज पहुंच से दूर हो गया है। पहुंच मार्ग अत्यंत कठिन होने से भक्त जन पर्वत के निचले स्थान पर गंगा यमुना कुड में स्नान कर के वही से पूजन अर्चन कर के वापिस लौट जाते है।
द्वापर युग में पांडवों के निवास के हैं प्रमाण मौजूदः- द्वापर युग में पर्वत की जिन गुफाओं में पांचों पांडवो मां कुंती के साथ रहते थे। वे गुफायें दिनों दिन नष्ट हो रही है। देव पर्वत प्राचीन काल में सभी देवताओं का वास रहा है देव पर्वत से भगवान राम एवं पांचों पांडव शुक्राचार्य की पुत्री देवयानी एवं महा प्रभु वल्लभाचार्य की स्मृतियों को समेटे हुये प्राकृतिक सुंदरता से भरपूर स्थल है। यहां पर प्रतिवर्ष दूर दूर से भक्त जन आते है। क्षेत्रीय लोगों एवं आस पास के कई जिलों के लिये यह पर्वत किसी तीर्थ से कम नहीं है उपेक्षा का शिकार पर्वत जन प्रतिनिधियों एवं शासन प्रशासन की उपेक्षा का शिकार देव पर्वत में आने जाने वाले भक्तों के लिये सीढियों का निर्माण सुरक्षा हेतु रेलिंग निर्माण प्राचीन कुंडों का जीर्णोद्धार सीता रसोई का जीर्णोद्धार कराया जाना अति आवश्यक है आजादी के पूर्व आस पास की रियासतों के राजाओं द्वारा यहां के विकास के लिये काफी व्यवस्थायें की जाती थी लेकिन आजादी के बाद तो जन जन की आस्था का केंद्र देव पर्वत पूरी तरह उपेक्षा का शिकार है पुरातत्व विभाग भी इसके संरक्षण के लिये उदास है।
क्रांतिकारियों के आश्रय का केंद्र रहा देव पर्वतः- स्वतंत्रता आंदोलन का महत्वपूर्ण केंद्र रहा देव पर्वत 1857 की क्रांति के समय देव पर्वत क्रांतिकारियों का सुरक्षित भंडार रहा है क्रांतिवीर लक्ष्मण सिंह दौवा, अजयगढ़ रियासत के अपदस्थ नरेश, महराज लोकपाल सिंह, मीर फरजंदअली, पूरन पाठक, ठाकुर दास सिंगरौल यही से अंग्रेजों के खिलाफ अपना अभियान संचालित करते थे भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन 1946 में बुंदेलखंड के क्रांतिकारी राम सहाय तिवारी यही पर रूक कर धार्मिक कार्यक्रमों के बहाने मझगांय के मोतीलाल बनाफर, बल्देव प्रसाद अवस्थी बनहरी, बेटा दुबे, गिरजाशंकर खरे, स्वामीदीन पिढिया, देवीदयाल पाठक, राम कुमार लोध, सूरज खरे, रामेश्वर प्रसाद तिवारी, रघुवीर सिंह, भूरा लोध, विशाली यादव समेत क्षेत्र के जागरूक एवं स्वतंत्रता आंदोलन से जुडे लोगों को एकत्र कर आस पास की रियासतों एवं जमीदारों के खिलाफ जन मानस में विद्रोह का वातावरण बनाते थे एवं स्वतंत्रता आंदोलन के समय देव पर्वत, पांडव फाल एवं खोरा का धूनी आश्रम क्रांतिकारियों के आश्रय का महत्वपूर्ण केंद्र रहा है।
