जबलपुर: सडक़ों में स्कूल की पार्किंग के खिलाफ हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की गई है। जिसमें कहा गया है कि स्कूल परिसर के अंदर पार्किंग न होने व सडक़ों में वाहन पार्क होने से नौनिहालों का जीवन खतरे में है। आरोप है कि बच्चें सडक़ पार कर निकलते है, जिससे वह कभी भी हादसे का शिकार बन सकते है। जबकि राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग द्वारा साल 2022 में जारी गाइडलाइन के अनुसार पढऩे वाले छात्रों की वाहनों की पार्किंग स्कूल के अंदर होनी चाहिये।
चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा व जस्टिस विनय सराफ की युगलपीठ ने सुनवाई दौरान पाया कि मध्य प्रदेश बाल अधिकार संरक्षण आयोग को नोटिस की तामील नहीं हुई। जिस पर न्यायालय ने फ्रेश नोटिस जारी कर उनके पैरोकार को शपथ पत्र पर जवाब देने के निर्देश दिये है। मामले की अगली सुनवाई चार सप्ताह बाद निर्धारित की गई है।
दरअसल यह जनहित का मामला जबलपुर निवासी अधिवक्ता जसबीन गुजराल सहित अन्य की ओर से दायर किया गया है।
जिसमें कहा गया है कि कि बचपन बचाओ आंदोलन विरुद्ध भारत सरकार के संबंध में सर्वोच्च न्यायालय ने बच्चों की सुरक्षा व उनकी देखभाल के संबंध में आवश्यक गाईडलाइन जारी की थी। सर्वोच्च न्यायालय ने उक्त गाईडलाईन देश के सभी प्रदेशों के लिए जारी की थी। इसके अलावा साल 2022 में राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग द्वारा भी गाईडलाईन जारी की गयी थी। जिसके अनुसार जिन वाहनों से छात्र आते है, उनकी पार्किंग स्कूल के अंदर होनी चाहिये। इस संबंध में प्रदेश के सभी कलेक्टर को निर्देश भी जारी किये गये थे।
याचिका में कहा गया था कि शहर के अधिकांश स्कूलों की पार्किंग सडक़ में होती है। स्कूल बच्चों को स्कूल के बाहर सडक़ों पर उतार दिया जाता है। जिसके कारण सडक़ में जाम की स्थिति निर्मित होती है। जिससे लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ता है और स्कूल आने वाले बच्चों के साथ कोई हादसा घटित हो सकता है। याचिका में मुख्य सचिव, संभागायुक्त, कलेक्टर, निगमायुक्त, पुलिस अधीक्षक यातायात तथा मध्य प्रदेश बाल अधिकार संरक्षण आयोग को पक्षकार बनाया गया था। मामले में विगत 21 अप्रैल को हुई प्रारंभिक सुनवाई के बाद न्यायालय ने सभी अनावेदकों को नोटिस जारी कर जवाब पेश करने के निर्देश दिये थे।
