अज्ञात भय में छोड़ गए लाखों के जूते-चप्पल

उज्जैन। शनिश्चरी अमावस्या के अवसर पर सूर्यपुत्र शनिदेव के प्राचीन मंदिर में आस्था का सैलाब उमड़ा। श्रद्धालुओं ने क्षिप्रा तट पर स्नान कर शनिदेव का पूजन-अर्चन किया। परंपरा के चलते हजारों श्रद्धालुओं ने मंदिर परिसर में अपने जूते-चप्पल छोड़ दिए। लोकमान्यता है कि ऐसा करने से पनौती, साढ़ेसाती और ढैया जैसी बाधाएं दूर होती हैं और शनि की विशेष कृपा मिलती है। इसी अज्ञात भय और आस्था के कारण लाखों रुपए के जूते-चप्पल मंदिर के बाहर छूट गए, जिन्हें बाद में मंदिर समिति नीलाम करती है।

सुबह से ही लंबी कतारों में श्रद्धालु दर्शन के लिए जुटे। मंदिर पर तेल अर्पण, दीपदान और विशेष पूजा की गई। प्रशासन ने श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए यातायात डायवर्ट कर पार्किंग, पानी और सफाई की समुचित व्यवस्था की। नगर निगम, पुलिस और मंदिर प्रबंधन मिलकर व्यवस्था संभालते रहे।

इंदौर, देवास, शाजापुर, आगर सहित विभिन्न जिलों से आए श्रद्धालुओं ने जयकारों के साथ शनि भक्ति में भाग लिया। शनि मंदिर को फूलों से सजाया गया और भगवान शनि को राजसी श्रृंगार कर पगड़ी धारण कराई गई। देर रात तक श्रद्धालुओं का आना-जाना जारी रहा।

 

 

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