जबलपुर:रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय में भारी अनियमितताएं की जांच होने के बावजूद भी शासन एवं विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा आज दिनांक तक कोई कार्यवाही नहीं की गई है। इस जांच प्रतिवेदन में एक और बात सामने आई है, जिसमें जांच समिति के प्रतिवेदन के अनुसार उत्तर पुस्तिकाओं की प्रिंटिंग के लिए 25 मार्च 2022 को निविदा जारी की गई। निविदा के अंतर्गत सम्पूर्ण व्यय और भुगतान में नियमों का उल्लंघन करते हुए करोड़ों रुपए का अनियमित भुगतान किया।
प्रतिवेदन अनुसार इस प्रक्रिया में मार्च 2017 से 5 अक्टूबर 2024 तक पदस्थ रहे कुल सचिव एवं वित्त नियंत्रक सम्मिलित है। विदित है कि उच्च शिक्षा विभाग के आदेश अनुसार विश्वविद्यालय की लेखा शाखा में रीवा की टीम द्वारा वित्तीय अनियमितता की जांच की गई है। जानकारी के अनुसार समिति ने 18 और 19 दिसंबर को से रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय जबलपुर में रहकर शिकायत से संबंधित अभिलेखों की जांच और शिकायती बिन्दुओं से संबंधित अभिलेखों की जांच की थी।
सिर्फ मनीष ट्रेडर्स के नाम पर हुआ भुगतान
जांच प्रतिवेदन के अनुसार निविदा के अंतर्गत 13 सितंबर 2022 को 1,45,02000 रुपए का क्रय आदेश दिया गया। उक्त आदेश के विरूद्ध 16 सितंबर 2022 को 4415656 रुपए, 30 सितंबर 2022 को 5711 रुपए, 12 जून 2023 को 20500 रुपए, 14 सितंबर 2022 को 19964 रुपए, 25 अप्रैल 2023 को 51250 रुपए, 7 अगस्त 2023 को 614898 रुपए, 31मार्च 2023 को 33,60,000 रुपए, 15 मई 2023 को 2767500 रुपए, 8 जून 2023 को 205000 रुपए, 8 जून 2023 को 6726776 रुपए के कुल 5 देयक प्रस्तुत किये गए, उसमें 14984180 रूपए एक ही आदेश पर 2 वर्ष तक निरंतर प्रस्तुत किये गये, जोकि मनीष ट्रेडर्स जबलपुर के नाम भुगतान किये गये।
वित्त नियंत्रक एवं रजिस्टार सम्मिलित
इसी प्रकार पूर्व में 29 मार्च 2017 से 6 फरवरी 2020 तक निरंतर मनीष ट्रेडर्स के नाम से ही 3.23.75442 रूपए का भुगतान किया गया। सम्पूर्ण व्यय-भुगतान में भण्डार क्रय नियम का उल्लंघन करते हुए अनियमित भुगतान किया गया। जिसमें कुल 3,23,75442 रुपए एवं 14975742 रुपए का किया गया, भुगतान अनियमितता की परिधि में है। इस प्रक्रिया में भण्डार प्रभारी के साथ वित्त नियंत्रक एवं रजिस्टार सम्मिलित है। इस अनियमितता में मार्च 2017 से 6 अक्टूबर 2024 तक पदस्थ रहे कुल सचिव एवं वित्त नियंत्रक्त सम्मिलित है।
तीन की जगह दो समाचार पत्र में दी निविदा
उत्तर पुस्तिकाओं की प्रिंटिंग आर्डर और स्टॉक की पूरी जांच की गई थी। जांच प्रतिवेदन में बात सामने आई है कि उत्तर पुस्तिकाओं की प्रिटिंग के लिए 25 मार्च 2022 को निविदा जारी की गई जो कि मात्र दो समाचार पत्रों में प्रकाशित की गई जो कि न्यूनतम तीन समाचार पत्रों जिसमें एक राष्ट्रीय दो राज्य समाचार-पत्रों में प्रकाशित की जानी थी। जिससे सम्पूर्ण निविदा संदिग्ध हो गई।
इनका कहना है
शासन से अभी तक कोई भी रिपोर्ट हम तक नहीं पहुंची है, आगे शासन द्वारा जो निर्देश हमको दिए जाएंगे, उसके आधार पर आगे की कार्यवाही की जाएगी।
प्रो. डॉ राजेश कुमार वर्मा, कुलगुरु
