
मंडला। जिले में हालिया स्थानांतरण आदेशों को लेकर शिक्षा विभाग में गहरा असंतोष है। आरोप है कि शासन के स्पष्ट निर्देशों की अनदेखी करते हुए वरिष्ठ अधिकारियों को दरकिनार कर कनिष्ठ शिक्षकों को बीईओ जैसे उच्च प्रशासनिक पद का प्रभार सौंपा गया है, जिससे न केवल प्रशासनिक संतुलन बिगड़ रहा है बल्कि कर्मचारियों में आक्रोश भी बढ़ता जा रहा है।
17 जून 2025 को सहायक आयुक्त, जनजातीय कार्य विभाग मंडला द्वारा जारी आदेश में प्रभारी मंत्री की स्वीकृति का हवाला देते हुए उच्च माध्यमिक शिक्षकों को बीईओ का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया, जबकि शासन के आदेशों के अनुसार ऐसे पदों पर केवल वरिष्ठ या समकक्ष अधिकारी को ही प्रभार सौंपा जाना चाहिए।
विभागीय सूत्रों के अनुसार, इस आदेश में म.प्र. शासन सामान्य प्रशासन विभाग तथा जनजातीय कार्य विभाग द्वारा पूर्व में जारी दिशानिर्देशों की अवहेलना की गई है। कर्मचारियों का कहना है कि इससे वरिष्ठ अधिकारियों को कनिष्ठों के अधीन काम करना पड़ रहा है, जो प्रशासनिक मर्यादा के विरुद्ध है।
शिक्षक संगठनों ने मांग की है कि तबादला नीति में पारदर्शिता लाई जाए और नियम विरुद्ध पदस्थापनों पर तत्काल रोक लगाई जाए, अन्यथा आंदोलन की चेतावनी दी गई है।
इनका कहना है
“वरिष्ठ की जगह कनिष्ठ को बीईओ का प्रभार दिया जाना गलत है। जिला शिक्षा समिति की बैठक में यह मामला उठाया जाएगा। अधिकारियों को शासनादेश का पालन करना चाहिए।”
इंजी. कमलेश तेकाम, उपाध्यक्ष एवं अध्यक्ष, शिक्षा समिति, जिला पंचायत मंडला
“प्रभारी मंत्री के अनुमोदन से आदेश हुए हैं। ये नियुक्तियां केवल अतिरिक्त प्रभार के लिए की गई हैं। स्थायी बीईओ की पदस्थापना के बाद इन्हें हटाया जा सकता है।”
बंदना गुप्ता, सहायक आयुक्त, जनजातीय कार्य विभाग, मंडला
