सतना:दुनिया के सफेद बाघों की सरजमी में अब से नौ बरस पहले बड़ी उम्मीदों के साथ सफे द बाघों के पुर्नवास व नस्ल सुधार की दृष्टि से तब के सतना जिले के मुकुन्दपुर में ओपन टाइगर सफारी बनाई गई थी.इस सफारी के निर्माण से अब तक जब भी कोई जानकारी आयी उसने मायूस किया.अब तक दो सफेद बाधिन और एक बाघ के अन्तिम संस्कार चिता सजा चुके सफारी परिसर में से कभी कोई खुशखबरी नहीं आयी.
गौरतलब है कि सफेद बाघों के नस्ल सुधार और उनकी जैविकीय परिस्थितियों को बेहतर बनाने की दृष्टि शोध केन्द्र के रूप में विकसित इस केन्द्र में शोध के नाम पर अब तक क्या? किया गया यह बताने का कभी कोई प्रयास नहीं किया गया.यह भी जानकारी कभी प्रकाश में नहीं आयी की सफेद बाघों की संतति वृद्धि में अनुकूलता के बाद कोई उपलब्धि दर्ज नहीं हुई.लम्बी चौडी अधिकारियों,कर्मचारियों की फौज वाले इस सफारी के नाम पर जो जानकारी सार्वजनिक की जाती है.उसमें यही बताया जाता है कि प्रतिवर्ष यहां पहुचने वाले पर्यटकों की संख्या में लगातार वृद्धि हो रही है.और आमदनी का आंकडा लाखों से करोडों में पहुच रहा है.इन परिस्थितियों में जानकार यह महसूस करने लगे हैं कि प्रबंधन अपने मूल उद्धेश्य से भटक गया है.यह वजह है कि सब कुछ की अनुकूलता के बावजूद अभी तक बीते नौ सालों में कोई बडी उपलब्धि दर्ज नहीं हुई है.
विन्ध्या को पाकर मन गदगद हो गया
मुकुन्दरपुर में टाइगर सफारी बनने के बाद वर्षों बाद सफेद बाघ की धरती में जब विन्ध्य के कदम पड़े तो सभी के बीच उत्सवी माहौल था.यह भी लग रहा था कि अब एक बार फिर विन्ध्य की धरती उनकी संतति से आवाद होगी.पर यह खुशी तब समाप्त हो गई जब बिना जैनेटिक साइंस के अध्यन के उसकी मीटिगं करने का प्रयास किया गया.दो बाघों के बीच हुए संघर्ष में उसे इतने घाव लगे कि अन्त में उसे इस दुनिया से ही विदा लेने के लिए मजबूर होना पडा.बाद में बाधिन राधा की मौत का कारण भी बीमारी का होना बताया गया.अब सफेद बाघ टीपू की मौत के बाद कहा जा रहा है कि उसे 2023 में जब लाया गया था .तभी से उसकी कुछ अस्वस्थता के लक्षण दिखाई दिए थे.दिल्ली के चिडियाघर से लाए गए टीपू की मौत के पीछे विशेषज्ञ किडनी का फेल होना बता रहे है.प्रश्र अब भी वही है कि विशेषज्ञों की जांंच पडताल के बाद जंगली जीवों का स्थानातरण किया जाता है.फिर ऐसा क्यों हुआ?
सिर्फ व्यवसायिक गतिविधियां
सफारी बनने के साथ ही क्षेत्र में व्यवसायिक गतिविधियों की बाढ़ सी आ गई है.देश के नामी गिरमी घरानों ने भी लाखों करोडो का निवेश मुकुन्दपुर के आसपास किया है.स्थानीय लोगों का कहना है कि बाहर लोगों की आमद क्षेत्र में काफी रहती है.लोग आसपास के रिसार्ट में रूक कर पार्टी व व्यक्तिगत उत्सवों का आयोजन करते हैं.कभी देर रात तक तेज स्वरों में गीत संगीत बजता रहता है.जबकि इस प्रकार के केन्द्रों के आसपास की गतिविधियों के लिए राष्ट्रीय स्तर पर कुछ मापदण्ड तय किए गए हैं.जिनका पालन करना स्थानीय प्रशासन व सफारी प्रबंधन का दायित्व है.इसकी भी खुलकर अनदेखी की जा रही है.
