जबलपुर: हनी ट्रैप कांड के बाद चौकी प्रभारी की भूमिका संदेह के दायरे में आ गई है। दो आरक्षक लाइन अटैच किए जा चुके है। मामले की विभागीय जांच तेज कर दी गई है। हुस्न के जाल में फंसाने के बाद और कितने लोगों को शिकार बनाया गया है साथ ही पुलिस कर्मियों की इसमें कितनी भूमिका है, डील चौकी में हुई तो वहां कौन-कौन मौजूद था समेत अन्य बिन्दुओं का पता लगाा जा रहा है।
अब तक की जांच में यह बात भी सामने आई है कि पुलिस स्टॉफ के साथ चौकी प्रभारी भी मौके पर पहुंचे थे और ब्लेकमेलिंग कांड के बाद वह रात में ही छुट्टी पर चले गए थे। चौकी प्रभारी पर भी विभागीय कार्रवाई की तलवार लटकी हुई है।विदित हो कि पावला बेलखेडा निवासी दो भाई इंस्टाग्राम के जरिए रागिनी शर्मा के संपर्क में आए थे। शुक्रवार को दोनों युवती से मिलने पेट्रोल पंप के पास पहुंचे थे जहां युवती को उन्होंने नगद 500 रूपये दिए थे।
इसके बाद तीनों गाडी मेंं बैठकर ईडब्ल्यूएस क्वार्टर शताब्दी पुरम में पहुंचे थे जहां रागिनी शर्मा ने दस मिनट बाद फोन करके अपने साथी विवेक तिवारी एवं साहिल बर्मन को बुला लिया था। जिन्होंने वीडियो बनाने के साथ दोनों भाईयों की पिटाई की थी। इसी बीच पुलिस मौके पर पहुंच गई थी और सभी को थाने लेकर चली गई थी। इसके बाद विवेक, साहिल चौकी में ही पुलिस की मौजूदगी में पीडि़त से एक लाख रूपए मांगने लगे थे और नहीं देने पर बलात्कार के केस में फंसाने की धमकी देने लगे थे।
अफसरों तक पहुंची खबर तो बैकफुट पर आया स्टॉफ
सूत्रों के मुताबिक पुलिस चौकी में करीब चार घंटे तक डील चलती रही। पीडि़त भी डर गए और पैसे देने के लिए राची हो गए थे। उन्होंने मामले की सूचना परिजनों को दी और पैसे भेजने के लिए बोला तो परिजन ब्लेकमेलिंग के मामले को समझ गए और उन्होंने पैसे देने से मना करते हुए रिपोर्ट दर्ज कराने की बात कहीं। इसके बाद मामला आला अधिकारियों तक पहुंंंचा जब इसकी खबर चौकी स्टॉफ को लगी तो वह बैकफुट पर आ गए थे। जिसके बाद हनी ट्रैप गैंग पर एफआईआर दर्ज हुई। रागिनी शर्मा, विवेक तिवारी, साहिल बर्मन के खिलाफ विभिन्न धाराओं के तहत प्रकरण दर्ज हुआ। तीनों को जेल भेजा गया लेकिन अधिकारियों को पता चला कि डील चौकी में हुई तो जांच बैठ गए।
दो निपटे, जो बचे उनकी नींद उड़ी
मामले में पुलिस अधीक्षक ने तत्काल प्रभाव से दो आरक्षकों सचिन जैन, सिद्धार्थ दुबे को चौकी से हटाने के साथ लाइन अटैच किया है जबकि चौकी प्रभारी अनिल कुमार सिंह समेत अन्य की भूमिका संदेह के दायरे मेंं है। मामले की जांच चल रही है। सूत्रों की माने तो पुलिस की मिलीभगत से हनी ट्रैप गैंग सक्रिय थी।जिसमें कई और शामिल है।जिसका पता लगाने सीसीटीव्ही कैमरों को खंगालने के साथ कॉल डिटेल निकाली जा रही है इस मामले में जो बचे हुए है उनकी नींद उड़ गई है । चौकी प्रभारी के अवकाश पर लौटने के बाद उनके भी बयान दर्ज होगे।
