जबलपुर: मप्र हाईकोर्ट ने कर्मचारियों को शासकीय सेवा में समायोजित करने के मामले में कहा कि सरकार कर्मचारियों के बीच भेदभाव नहीं कर सकती। इस मत के साथ जस्टिस विवेक जैन की एकलपीठ ने सरकार को बालाघाट के कर्मचारियों को विदिशा कर्मियों के समान नियमित करने पर विचार करें। कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं के अभ्यावेदन पर तीन माह के भीतर विधि सम्मत निर्णय पारित करने के निर्देश दिए।
बालाघाट निवासी तेजलाल उइके, राजकमल सोनकर व अन्य की ओर से अधिवक्ता मोहनलाल शर्मा व शिवम शर्मा ने पक्ष रखा। उन्होंने बताया कि दलील दी गई कि याचिकाकर्ता लगातार चुनाव के समय ड्यूटी करते चले आ रहे हैं। उन्हें चुनाव के समय सेवा में ले लिया जाता है और उसके बाद उन्हें बिना कोई विधिवत आदेश के बाहर कर दिया जाता है।
इस मामले में पूर्व में हाईकोर्ट ने नियमों के तहत ऐसे कर्मियों को शासकीय सेवा में समायोजित करने के निर्देश दिए थे। दलील दी गई कि इस मामले में हाईकोर्ट के निर्देश पर विदिशा जिले में कई कर्मचारियों को सेवा में समायोजित कर लिया गया। याचिकाकर्ताओं ने भी संबंधित अधिकारी के समक्ष दावा प्रस्तुत किया, जोकि निरस्त कर दिया गया, जिस पर हाईकोर्ट की शरण ली गई थी।
