जबलुपर: भ्रष्टाचार के मामले में दोषमुक्त होने के बावजूद भी सेवा में बहाल नहीं किये जाने के खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका दायर की गयी थी। याचिका में कहा गया था कि जिस प्रकरण में उसे रिश्वत लेते हुए पकडा गया था वह उसके संबंधित थाने का नहीं था। हाईकोर्ट जस्टिस एम एस भट्टी की एकलपीठ ने याचिका का निराकरण करते हुए पुलिस महानिरीक्षक शहडोल को 60 दिनों में याचिकाकर्ता के अभ्यावेदन का निराकरण करने आदेश जारी किये हैं।
याचिकाकर्ता सतीश द्विवेदी की तरफ से दायर की गयी याचिका में कहा गया था कि वह अनूपपुर जिले के रामनगर थाने में उपनिरीक्षक के पद पर पदस्थ था। दुर्भावना वश झूठे प्रकरण में लोकायुक्त द्वारा ट्रेप कराया गया था। लोकायुक्त के द्वारा भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत दर्ज किये गये प्रकरण में ट्रायल कोर्ट ने में उसे दोषी मानते हुए सजा से दंडित किया था। जिसके खिलाफ उसने हाईकोर्ट में अपील दायर की थी।
हाईकोर्ट ने सुनवाई के दौरान पाया था कि जिस प्रकार में रिश्वत लेने के आरोप था वह उससे संबंधित थाने का नही था। हाईकोर्ट ने अप्रैल 2025 में उसे दोषमुक्त कर दिया था। दोषमुक्त होने के बाद उसके सेवा में बहाली के लिए संबंधित अधिकारियों को अभ्यावेदन दिया था। अभ्यावेदन पर कोई कार्यवाही नहीं होने के कारण उक्त याचिका दायर की गयी है। एकलपीठ ने याचिका की सुनवाई करते हुए अपने आदेश में आईजी शहडोल को निर्देशित किया है 60 दिनों में याचिका कर्ता के अभ्यावेदन का निराकरण करें। याचिकाकर्ता की तरफ से अधिवक्ता दीपक पांडे ने पैरवी की।
