मंडला: नगर पालिका की नाकामी ने शहर की सड़कों को गौशाला बना दिया है। सुबह 5 बजे से ही मुख्य मार्गों पर मवेशियों का कब्ज़ा हो जाता है, लोग दुर्घटनाओं के डर से जूझते हैं और अंधेरी गलियों में हालत और भी भयावह हो जाती है।गत दिवस बिछिया तिराहा में दो बेलों की लड़ाई में कई वाहन क्षतिग्रस्त हो गए। इससे पहले सब्ज़ी मंडी और जवाहरगंज बाजार में भी ऐसी ही बेलों की भिड़ंत के चलते एक-एक महिला की जान जा चुकी है। ये घटनाएँ बताती हैं कि समस्या केवल असुविधा नहीं बल्कि जनहानि का गंभीर खतरा बन चुकी है।
हद तो तब हो गई जब सड़क पर बैठे गौवंश की समस्या पर एक जागरूक नागरिक ने 181 सीएम हेल्पलाइन में शिकायत दर्ज की। शिकायत पर कार्रवाई करने की बजाय, नगर पालिका अधिकारियों ने शिकायतकर्ता पर ही दबाव बनाना शुरू कर दिया कि वह अपनी शिकायत वापस ले ले। सवाल उठता है – क्या नगर पालिका शिकायतें दबाने के लिए है या समस्याएँ सुलझाने के लिए ?रपटा पुल पर नगर पालिका की “मेहनत” साफ झलकती है सड़क पर लाइट और रेलिंग तो हैं, लेकिन बीच सड़क पर जमे मवेशी किसी भी वक्त जानलेवा हादसों को न्योता दे रहे हैं।
जनता का तंज
नगर पालिका मंडला का नया स्लोगन होना चाहिए –
जहाँ चाह वहाँ गाय… जहाँ जगह वहाँ बैल!”
स्पष्ट है कि नगर पालिका की यह लापरवाही अब सीधा जनसुरक्षा से खिलवाड़ है। यदि प्रशासन ने तुरंत कदम नहीं उठाए, तो किसी बड़े हादसे की ज़िम्मेदारी केवल और केवल नगर पालिका की होगी।
