
उज्जैन। महाकाल को महानिर्वाणी अखाड़े को सौप देने के बयान के बाद मंदिर के पुजारी भडक़ गए। मंगलवार को यह एक नया ही विवाद सामने आया। दरअसल महामंडलेश्वर प्रेमानंद पुरी महाराज ने उज्जैन में चल रही होटल नक्षत्र में अपनी कथा में यह कह दिया कि महाकाल मंदिर से सरकारी नियंत्रण हटा देना चाहिए और उसे महानिर्वाणी अखाड़े को सौंप देना चाहिए।
इस बयान का एक वीडियो सोशल मीडिया पर जैसे ही वायरल हुआ महाकाल मंदिर के पुजारी महेश शर्मा ने इस पर आपत्ति लेते हुए कहा कि महाराज पहले अपने अपने अखाड़े की गंदगी साफ करो फिर मंदिरों की तरफ देखना। अखाड़े में बैठे शादीशुदा संतों को बाहर निकालें। अखाड़ों में कई अव्यवस्थाएं चल रही है। पहले उसमें सुधार करें फिर मंदिर की व्यवस्था पर सवाल उठाए। रहा सवाल प्रशासन का तो सालों से महाकाल मंदिर को शासन-प्रशासन ही चलाता आ रहा है। कहीं कोई कमी नहीं है। सब अच्छे से चल रहा है। भविष्य में यदि मंदिर से सरकारी नियंत्रण हटता भी है तो इसे मंदिर के 16 अधिकृत पुजारियों को देना चाहिए, न कि किसी अखाड़े को। पुराने समय में पुजारी ही मंदिर चलाते थे।
