दिल्ली के बच्चों को मिलेगी गुणवत्ता पूर्ण शिक्षा : रेखा

नयी दिल्ली, 09 अगस्त (वार्ता) दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने दिल्ली के अभिभावकों को आश्वस्त किया है कि अब उनके बच्चे राजधानी में गुणवत्ता पूर्ण शिक्षाा प्राप्त करेंगे।

श्रीमती गुप्ता ने शनिवार को बयान जारी कर कहा कि शुक्रवार को दिल्ली विधानसभा में उनकी सरकार ने ऐतिहासिक ‘दिल्ली स्कूल शिक्षा (फीस निर्धारण और विनियमन में पारदर्शिता) विधेयक 2025’ को बहुमत से पारित कर दिया है। विधेयक दिल्ली की शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता, न्याय और जवाबदेही की नई नींव रखेगा और निजी स्कूलों की वर्षों से चली आ रही मनमानी पर निर्णायक प्रहार करेगा।

उन्होंने कहा कि निजी स्कूल दिल्ली की हकीकत बन चुके हैं, क्योंकि अब तक की सरकारें पर्याप्त गुणवत्ता वाले सरकारी स्कूल नहीं बना सकीं। दिल्ली में निजी स्कूलों की बढ़ती संख्या कोई अचानक की घटना नहीं है, बल्कि यह विपक्ष के वर्षों तक गुणवत्तापूर्ण सरकारी शिक्षा देने में विफल रहने का परिणाम है।

उन्होंने कहा कि पूर्व सरकारों ने दिल्ली की जनता को अच्छी शिक्षा नहीं दी, इसलिए अभिभावकों को निजी स्कूलों की ओर रुख करना पड़ा। हमारा बस यही उद्देश्य है कि राजधानी के हर वर्ग का बच्चा इन स्कूलों मे शिक्षा प्राप्त करे और अभिभावकों को स्कूल फीस का गहरा दंश न झेलना पड़े। हमारी सरकार ने शिक्षाा विशेषज्ञों, अभिभावकों आदि से विचार विमर्श कर इस विधेयक को पारित किया है।

मुख्यमंत्री कहा कि दिल्ली में लगभग 1,733 निजी स्कूल हैं, जिनमें से करीब 300 को डीडीए ने सस्ती दरों पर जमीन उपलब्ध कराई है। जमीन की शर्तों के अनुसार अगर कोई स्कूल नियमों का उल्लंघन करता है, तो कार्रवाई का अधिकार डीडीए के पास है। दिल्ली सरकार के शिक्षा विभाग का निदेशक केवल डीडीए को पत्र लिख सकता है। इससे आगे वह कुछ नहीं कर सकता। मुख्यमंत्री के अनुसार शिक्षा विधेयक में शिक्षा निदेशक को एसडीएम जैसी शक्तियां दी गई हैं। नए नियमों के अनुसार उसे स्कूल के खाते सीज़ करने, चल-अचल संपत्ति अटैच करने तक की शक्ति प्रदान की गई है। हमारे विधेयक की परिधि में डीडीए वाले 300 स्कूल नहीं बल्कि सभी 1,733 स्कूल हैं। इनमें से जो भी मनमानी फीस का सिस्टम लागू करेगा, दिल्ली सरकार का शिक्षा विभाग उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई करेगा।

उन्होंने यह भी बताया कि पूरी संवेदनशीलता और दूरदर्शिता से इस विधेयक के हर प्रावधान को तैयार कराया गया है, जिसमें अभिभावकों का हित केंद्र में है। सरकार का दृष्टिकोण संतुलित है, न तो स्कूलों पर अराजक दबाव और न ही अभिभावकों पर आर्थिक बोझ। मुख्यमंत्री के अनुसार उन्होंने स्वयं विधेयक का मसौदा तैयार करने से लेकर हर बैठक में भाग लेकर यह सुनिश्चित किया कि अभिभावकों का हित ही इसका मुख्य उद्देश्य रहे और किसी भी तरह से इसे कमजोर न होने दिया जाए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछली आम आदमी पार्टी सरकार अपनी शिक्षा क्रांति की बड़ी बड़ी बातें करती रहीं, लेकिन शिक्षा क्षेत्र में उनके भ्रष्टाचार जगजाहिर हैं। स्कूलों के कमरे बनाने में करोड़ों रुपये के घोटाले की जांच तो चल ही रही है, इसके अलावा स्कूलों की अधूरी इमारतें, अटकी हुई शिक्षक भर्ती और भ्रष्टाचार से सड़ चुकी शिक्षा व्यवस्था ही उनकी असली पहचान बन गई थी। मुख्यमंत्री ने विपक्ष से पूछा कि अगर आप और कांग्रेस इतने ही शिक्षा हितैषी थे, तो 27 साल में फीस नियंत्रण का कोई कानूनी व्यवस्था क्यों नहीं बनाया?

 

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