नयी दिल्ली, 09 अगस्त (वार्ता) दूरसंचार सुरक्षा बढ़ाने और आम लोगों को सशक्त करने के उद्देश्य से इस साल जनवरी में जारी ‘संचार साथी’ ऐप को 50 लाख से अधिक बार डाउनलोड किया जा चुका है।
दूरसंचार विभाग (डीओटी) ने देश की व्यापक भाषाई और क्षेत्रीय विविधता को ध्यान में रखते हुए अंग्रेजी, हिंदी और 21 क्षेत्रीय भाषाओं को सपोर्ट करके ऐप की पहुंच का विस्तार किया है। इस ऐप ने धोखाधड़ी वाले कॉल और संदेशों की रिपोर्टिंग को और भी आसान बना दिया है। अब यूजर कुछ ही टैप में सीधे अपने कॉल और एसएमएस लॉग से रिपोर्ट दर्ज कर सकते हैं।
संचार मंत्रालय की शनिवार को जारी प्रेस विज्ञप्ति में बताया गया है कि संचार साथी पहल के तहत 5.35 लाख से ज्यादा खोए या चोरी हुए मोबाइल हैंडसेट वापस मिल चुके हैं। आम लोगों की रिपोर्ट के आधार पर एक करोड़ से ज्यादा अनधिकृत मोबाइल कनेक्शन काटे गये हैं, और ‘चक्षु’ सुविधा के जरिए चिह्नित 29 लाख से ज्यादा मोबाइल नंबरों को निष्क्रिय किया गया है। संचार साथी पोर्टल पर 16.7 करोड़ से ज्यादा लोग विजिट कर चुके हैं, जो इस नागरिक-केंद्रित डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म में जनता के बढ़ते विश्वास को दर्शाता है।
दूरसंचार विभाग ने वित्तीय धोखाधड़ी जोखिम संकेतक (एफआरआई) भी लागू किया है, जो वित्तीय धोखाधड़ी जोखिम से जुड़े मोबाइल नंबरों का आकलन और वर्गीकरण करता है। यह उपकरण बैंकों, एनबीएफसी और यूपीआई सेवा प्रदाताओं को उपभोक्ताओं की सुरक्षा के लिए सक्रिय कदम उठाने में सक्षम बनाता है। परिणामस्वरूप, 34 वित्तीय संस्थानों ने एफआरआई रेटिंग के आधार पर 10.02 लाख बैंक खातों/ भुगतान वॉलेट को फ्रीज कर दिया है और 3.05 लाख खातों में लेन-देन पर प्रतिबंध लगा दिये हैं।
16 मई 2023 को लॉन्च किये गये पोर्टल की सफलता को आगे बढ़ाते हुए, दूरसंचार विभाग ने 17 जनवरी 2025 को संचार साथी मोबाइल ऐप लॉन्च किया था, जो उपयोगकर्ताओं को दूरसंचार सुरक्षा सेवाओं तक सीधी और सुविधाजनक पहुंच प्रदान करता है। एंड्रॉइड और आईओएस दोनों प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध यह ऐप उपयोगकर्ताओं को अपनी दूरसंचार पहचान की सुरक्षा करने और संभावित धोखाधड़ी के खिलाफ त्वरित कार्रवाई करने में सक्षम बनाता है।
संचार साथी मोबाइल ऐप की मदद से संदिग्ध धोखाधड़ी संचार की रिपोर्ट की जा सकती है, अपने नाम पर जारी सिम का पता लगाया जा सकता है, खोये या चोरी हुये हैंडसेट को ब्लॉक कराया जा सकता है।
