राहुल ने लोगों तक संदेश पहुंचाने के लिए उठाया वोट चोरी का मुद्दा-गहलोत

जयपुर 08 अगस्त (वार्ता) राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के द्वारा उठाए गए वोट चोरी के मुद्दे पर उनकी वकालत करते हुए कहा है कि उनका नजरिया देश हित में हैं और उन्होंने लोकतंत्र को बचाने के लिए जनता को आगाह करने के लिए एटम बम का नाम लेकर वोट चोरी के मुद्दे को उठाया ताकि लोगों तक यह संदेश पहुंच सके।

श्री गहलोत ने शुक्रवार को यहां श्री राहुल गांधी द्वारा उठाए गए मुद्दे पर विशेष प्रेस वार्ता में यह बात कही। उन्होंने कहा कि श्री राहुल गांधी का बोलने, एटम बम कहने का जो नजरिया हैं वह देश हित में हैं, उसकी जीवनी ऐसी हैं, उनका व्यक्तित्व एवं कृतित्व ऐसे हैं और मैंने उन्हें करीब से पहचाना है उनमें किसी के भी प्रति दुर्भावना एवं घृणा नहीं हैं, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के प्रति भी नहीं है। उनको पहचानने में इन लोगों को वक्त लगेगा।

उन्होंने कहा कि राहुल गांधी ऐसा व्यक्ति है जो प्रेम एवं भाईचारा की बात करता है और देश हित में बोलता है। वह नोटबंदी, कोविड और किसी मुद्दे को लेकर आगाह करते है तो वह बात कड़वी लगती है लेकिन इससे सच्चाई सामने आती हैं। इसी तरह श्री राहुल गांधी का धर्म और कर्तव्य भी है कि जनता में क्या संदेश जा रहा हैं, इस पर राहुल गांधी ने खुलकर कहा है कि वास्तव में वोटो की चोरी हो रही है और यह तो लोकतंत्र को खतरा हैं, तब जाकर एटम बम का नाम लेकर लोकतंत्र कमजोर हो गया तो देश पर खतरा हैं।

उन्होंने कहा कि श्री राहुल गांधी ने यह मुद्दा उठाया है और जो आरोप लगाये हैं, चुनाव आयोग को इसका जवाब देना चाहिए। श्री राहुल गांधी से चुनाव आयोग द्वारा शपथ पत्र मांगने के सवाल पर श्री गहलोत ने कहा कि शपथ पत्र तो चुनाव आयोग को देना चाहिए कि हमारे यहां कोई गडबड़ नहीं हैं, जांच करा ली गई हैं इसमें कोई गडबड़ नहीं हैं। जो

आरोप लगाये गये हैं उनका खंडन करना चाहिए और कहना चाहिए कि जो राहुल गांधी बता रहे है यह बात सही नहीं है, जवाब देना चाहिए।

उन्होंन कहा कि चुनाव आयोग जिसे बिल्कुल निष्पक्ष होना चाहिए, कोई पार्टी के लोग आएं बातचीत करें, बात सुन लें उनकी उस पर जवाब नहीं देना, नहीं दे बाद में जवाब दे दे एवं सोचकर के कानून देखकर उस पर जो कहना है कह दे लेकिन दुर्व्यवहार करो कि कौन अंदर आएगा कौन नहीं आएगा पत्रों का जवाब जिस भाषा में चाहे कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन या राहुल गांधी को दिया वो जो भाषा है वो भी अपने आप में मैसेज देती है कि चुनाव आयोग निष्पक्ष नहीं है, जिस मुल्क में ये बात हो तो बहुत खतरनाक बात है।

उन्होंने कहा “ हालात बन गए हैं जब हम लोग कहते हैं कि लोकतंत्र को खतरा है देश के अंदर, बार बार हम बोलते हैं क्यों बोलते हैं, सारी संस्थाएं दबाव के अंदर हैं, कार्यपालिका हो, न्यायपालिका हो, विधायिका हो, और जितनी संस्था हैं वो दबाव के अंदर हैं और हम सब चाहेंगे कि यह सब संस्थाएं क्रेडिबल संस्था हैं इनकी साख बनी रहे और चुनाव आयोग पर पूरे लोकतंत्र का भविष्य टिका हुआ है। इसकी निष्पक्षता सबसे जरूरी है, उसी के साथ में लोकतंत्र का भविष्य जुड़ा हुआ है।”

उन्होंने कहा कि राहुल गांधी ने जो मामला उठाया है और कहा है कि एटम बम होगा क्यों कहा, एटम बम का असर भी एक इलाके में पड़ता है पर ये तो जो है इसका असर तो पूरे देश की 140 करोड़ की जो आबादी है उस पर पड़ने वाली बात है क्योंकि चुनाव में अगर हेराफेरी संस्थागत तरीके से करेंगे, चुनाव आयोग और सत्तारूढ़ पार्टी मिल जायेंगे तो लोकतंत्र कहा रहेगा। यह बहुत खतरनाक खेल हो रहा है देश के अंदर जिसकी तरफ राहुल गांधी ने देशवासियों को सचेत किया है एक प्रकार से। राहुल गांधी का कल का प्रेजेंटेशन कोई मामूली नहीं था, ये पूरे मुल्क के लोगों को एक प्रकार से मैसेज देना था कि क्या- क्या हो रहा है, जो उन्होंने चार पांच पॉइंट बताए थे किस प्रकार से हेराफेरी या किस प्रकार से अनियमितताएं हो रही है, अब चुनाव आयोग को चाहिए था कि निष्पक्ष होता वो, निष्पक्षता पर संदेह तो जैसे ही कानून पास किया श्री मोदी ने, चुनाव आयोग को कैसे सेलेक्ट किया जाए, तभी पैदा हो गया, जब उच्चत्तम न्यायालय ने कहा कि प्रधानमंत्री, नेता प्रतिपक्ष और उच्चत्तम न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश होंगे समिति के अंदर और वे चयन करेंगे चुनाव आयुक्त का, अगर वो प्रक्रिया होती तो न तो इतने संदेह पैदा होते, न न्यायालय में एसआईआर के लिए जाना पड़ता, न राहुल गांधी को ये नौबत आती कि वो ये सब बातें बताते , स्थिति ही नहीं बनती ये, पर जिस प्रकार से खेल हुआ कि चार दिन में छह दिन में कानून नया बन गया और केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह समिति में मुख्य न्यायाधीश की जगह लग गए, इससे संदेह पैदा नहीं होगा क्या, स्वाभाविक है, संदेह पैदा उस दिन से ही हो गया। उसके बाद में जो हम देख रहे हैं कि चुनाव आयोग का रवैया बदल गया, अभी चालीस पचास साल से हम लोग देख रहे हैं चुनाव आयोग पर कोई पक्षपात का आरोप भी लगाता था तो वो सफाई देता था।

उन्होंने कहा कि राहुल गांधी तो नेता प्रतिपक्ष भी हैं। अगर आम आदमी भी आरोप लगाए तो चुनाव आयोग की ड्यूटी है कि पब्लिक में जो एक अगर परसेप्शन बन रहा है तो उसको साफ करें, यह आयोग की ड्यूटी है।

 

 

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