इंदौर: कई महीनों से कस्बे की गलियों और सड़कों पर अकेली भटक रही एक मानसिक रूप से अस्वस्थ युवती की हालत पर आखिरकार मानपुर पुलिस ने संवेदनशीलता दिखाई और उसे इलाज के लिए मानसिक चिकित्सालय पहुंचाकर सराहनीय मानवीय उदाहरण पेश किया.यह युवती बीते कुछ समय से कभी थाना परिसर तो कभी मुख्य बाज़ार के आस-पास दिन-रात घूमती रहती थी.
किसी से ज्यादा बात नहीं करती, कभी-कभी जोर-जोर से चिल्लाती या खुद से बातें करती दिखती थी. आशंका जताई जा रही थी कि कहीं किसी दिन उसके साथ कोई दुर्घटना या अपराध न हो जाए. मानपुर थाने की महिला पुलिस अधिकारियों ने जब युवती से बात करने की कोशिश की, तो उसने खुद को रेशम पिता धर्मेंद्र गवली निवासी ग्राम गवलीपुरा (मानपुर) बताया और अपना जन्म वर्ष 1998 बताया.
लेकिन बातचीत के दौरान उसकी मानसिक स्थिति सामान्य नहीं पाई गई. पुलिस ने उसके बताए पते और परिजनों की काफी तलाश की, लेकिन कोई सामने नहीं आया. इसके बाद पुलिस अधीक्षक कार्यालय को जानकारी देने के बाद, वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देश पर थाना प्रभारी ने उपनिरीक्षक त्रिलोक बोरासी और सब उपनिरीक्षक रेशम गिरवाल को युवती के पुनर्वास व उपचार की जिम्मेदारी देते हुए उचित दिशा निर्देश दिए.
इसके बाद महिला डॉक्टर श्रीमती वीणा तिवारी ने सीएचसी मानपुर में युवती का प्राथमिक मानसिक परीक्षण किया, जिसमें उसकी अस्वस्थता की पुष्टि हुई. स्थानीय पार्षद श्रीमती रेखा जाट ने भी युवती के हालात के बारे में एक प्रमाण-पत्र दिया. इसके बाद युवती को मानसिक स्वास्थ्य अधिनियम के तहत महू एसडीएम राकेश परमार के सामने प्रस्तुत किया. वहां से जैसे ही अनुमति मिली उसे इलाज के लिए इंदौर के बांणगंगा स्थित मनोरोग चिकित्सालय में भर्ती करवाया गया.
