चंदेलकालीन धरोहर और आस्था का अद्भुत संगम है पहाड़ों पर बसा चमत्कारी जैन मंदिर द्रोणगिरि

(प्रियंका सिंह )

छतरपुर:सेंधपा गांव में स्थित द्रोणगिरि जैन तीर्थ धार्मिक, ऐतिहासिक और प्राकृतिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण स्थल है। यह सिद्ध क्षेत्र बुंदेलखंड में ‘मिनी शिखरजी’ के नाम से प्रसिद्ध है और हर वर्ष देशभर से हजारों श्रद्धालुओं और पर्यटकों को आकर्षित करता है।समुद्र तल से करीब 700 फीट ऊंचे पर्वत पर स्थित इस तीर्थ में कुल 78 जैन मंदिर हैं, जिनमें से 38 प्रमुख जिनालय हैं।

यहां तीन गुफाएं भी हैं, जहां गुरुदत्त स्वामी मुनिराज और आचार्य विद्यासागर ने कठोर तपस्या की थी। हर मंदिर पर क्रमांक दर्ज है, जिससे दर्शन मार्ग स्पष्ट रहता है। मंदिर के पास प्राचीन तालाब है, और चारों ओर सागौन, सेजा, तेंदुआ व अन्य कांटेदार वृक्षों का घना जंगल फैला है।स्थानीय पुजारी बताते हैं, “यहाँ आने वाले श्रद्धालुओं की मनोकामना जरूर पूरी होती है। कई भक्त ‘मढिया’ बनवाकर आस्था प्रकट करते हैं।” यहाँ 170 सीढ़ियाँ चढ़कर पर्वत पर पहुँचा जाता है।
पर्वत का आकार प्राकृतिक रूप से दोने जैसा प्रतीत होता है, जिससे इसका नाम ‘द्रोणगिरि’ पड़ा। यह स्थल छतरपुर से 57 किलोमीटर और बड़ामलहरा से 7 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है।
मंदिर की मुख्य विशेषताएं
78 प्राचीन जैन मंदिर
10वीं शताब्दी का चंदेलकालीन इतिहास
आचार्य विद्यासागर का तपस्थल
बुंदेलखंड में प्रसिद्ध ‘मिनी शिखरजी’
170 सीढ़ियों से चढ़ाई

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