इंदौर: उज्जैन रोड पर हुए भीषण सड़क हादसे में घायल पांच कांवड़ियों की जान एमवाय अस्पताल के डॉक्टरों ने अपनी मेहनत और विशेषज्ञता से बचा ली. महज 72 घंटे में 15 बड़े ऑपरेशन कर 26 इम्प्लांट लगाए गए, वहीं एक मरीज की फेमोरल आर्टरी की मरम्मत कर रक्तस्राव रोका गया. हादसे के समय सभी की हालत इतनी गंभीर थी कि ब्लड प्रेशर तक रिकॉर्ड नहीं हो पा रहा था.
30 जुलाई की रात करीब आठ बजे सोरेल के पास तेज रफ्तार छह पहिया ट्रक ने उज्जैन की ओर पैदल जा रहे सात कांवड़ियों को रौंद दिया था. हादसे में एक की मौके पर मौत हो गई, जबकि छह को गंभीर हालत में एमवाय अस्पताल लाया गया. इनमें से 18 वर्षीय जितेंद्र के हाथ और कॉलर बोन टूट गए, शुभम 26, यश 25 और विकास 27 को पैर व कमर में फ्रैक्चर आया, जबकि 32 वर्षीय दुर्गेश के शरीर में कई हड्डियां टूटीं, फेफड़ों में खून भर गया और हालत नाजुक हो गई.
22 वर्षीय ध्रुव को सिर में गहरी चोट और मल्टीपल फ्रैक्चर के साथ फेफड़ों में गंभीर चोट थी. एमजीएम मेडिकल कॉलेज के डीन डॉ. अरविंद घनघोरिया ने बताया कि सभी मरीज मल्टीपल फ्रैक्चर और इंटरनल इंजरी के साथ लाए गए थे. उन्हें तत्काल आईसीसीयू में भर्ती कर ब्लड ट्रांसफ्यूजन और इमरजेंसी ट्रीटमेंट दिया. हृदय व फेफड़ों को स्थिर करने के बाद रातभर ऑपरेशन चले.
ऑर्थो विभागाध्यक्ष डॉ. कुंदन कुशवाहा और वैस्कुलर सर्जन डॉ. अरविंद शुक्ला की टीम ने मिलकर सभी मरीजों का इलाज किया. डीन डॉ. घनघोरिया ने मरीजों का हालचाल लेने के बाद कहा कि एमवाय अस्पताल प्रदेश का अग्रणी संस्थान है, जो किसी भी मास कैजुअल्टी या आपातकालीन स्थिति से निपटने के लिए हर समय तैयार है. यहां बोन मैरो ट्रांसप्लांट यूनिट, ऑर्गन डोनेशन, एडवांस कैजुअल्टी, बोन बैंक, डायलिसिस यूनिट, मिल्क बैंक, वैक्सीनेशन प्रोग्राम सहित एक दर्जन से अधिक सरकारी योजनाओं के तहत मुफ्त और उच्चस्तरीय चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध हैं.
