जबलपुर: रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय में करोड़ों की वित्तीय अनियमितताओं की जांच के बावजूद अब तक शासन या विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा कोई कार्यवाही नहीं की गई है। जांच समिति ने 18-19 दिसंबर को संबंधित दस्तावेजों की जांच की, जिसमें कई गंभीर अनियमितताएं उजागर हुईं। जांच में सामने आया कि 2016 से रोकड़ बही का संधारण नहीं किया गया, और न ही चेक पंजी सही ढंग से रखा गया।
उत्तर पुस्तिकाओं की प्रिंटिंग निविदा केवल दो समाचार पत्रों में प्रकाशित की गई, जिससे प्रक्रिया संदिग्ध रही। करोड़ों का भुगतान बिना नियमों के किया गया। इसके अलावा, आपराधिक मामलों में शामिल कर्मचारी अभी भी विश्वविद्यालय में कार्यरत हैं।
मार्च 2017 से अक्टूबर 2024 तक कार्यरत कुलसचिव और वित्त नियंत्रक की भूमिका भी संदेह के घेरे में है। जांच समिति में डॉ. मुकेश तिवारी, डॉ. योगेन्द्र तिवारी सहित अन्य अधिकारी शामिल थे। कुलगुरु डॉ. राजेश वर्मा ने बताया कि शासन के निर्देशानुसार ही आगे की कार्यवाही की जाएगी।
