सिविल अस्पताल: बिजली गुल होने पर टार्च की रोशनी बनती सहारा

बुधनी. कहने को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र को सिविल अस्पताल का दर्जा प्राप्त हो गया है. 20 करोड़ रुपए की लागत से बिल्डिंग बनाई गई है, लेकिन बिजली गुल होने पर यहां कोई वैकल्पिक व्यवस्थाएं नहीं है. कर्मचारियों को टार्च की रोशनी में काम करना पड़ता है.

उल्लेखनीय है कि हाल ही में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र को सिविल अस्पताल का दर्जा प्राप्त हुआ है और इसके लिए विशाल भवन का निर्माण भी कराया गया है. व्यवस्थाओं की बात करें तो चिकित्सकों की कमी, स्टाफ नदारद,दवाइयों का टोटा और अब टॉर्च की रोशनी में काम करने को मजबूर कर्मचारी. ले देकर स्थिति जस की तस बनी हुई है. बिजली जाने पर अस्पताल में कोई वैकल्पिक व्यवस्था नहीं है. यहां लगा जनरेटर लंबे अर्से से खराब पड़ा हुआ है सोलर सिस्टम भी लगाया गया है. लेकिन फिर भी अस्पताल के कई कमरों में अंधेरा छाया रहता है.

गौरतलब है कि कुछ दिन पहले यहां की एक स्टाफ नर्स को अस्पताल भवन के अंदर ही सांप ने काट लिया था अब इसे अव्यवस्था कहें या लापरवाही परंतु इसके दुष्परिणाम यह होते हैं कि अस्पताल में आने वाले मरीजों को इसका खामियाजा भुगतना पड़ता है. शासन की योजनाओं का लाभ उन लाभार्थियों तक नहीं पहुंच पाता जो इसके हकदार होते हैं, क्योंकि कार्यालय में बत्ती गुल होने से काम ठप पड़ जाता है.

जनरेटर व सोलर की है सुविधा

अस्पताल में बिजली जाने के बाद सोलर सिस्टम और जनरेटर से विद्युत आपूर्ति की जाती है. कोई कमी है तो उसे दिखवाकर दूर कराया जाएगा.

डॉ. डी बड़ोदिया
सीबीएमओ, बुधनी

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