नयी दिल्ली, 29 जुलाई (वार्ता) राज्यसभा में मंगलवार को ऑपरेशन सिंदूर को लेकर हुई चर्चा के दौरान जहां सत्ता पक्ष ने ऑपरेशन की सफलता और आतंकवाद के खिलाफ सरकार के दृष्टिकोण को मजबूती से रखा वहीं विपक्षी दलों ने पहलगाम आतंकवादी हमले के दौरान सुरक्षा चूक तथ अन्य मुद्दों पर सरकार को कटघरे में खड़ा किया।
तृणमूल कांग्रेस की सागरिका घोष ने ऑपरेशन सिंदूर को लेकर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की टिप्पणी का उल्लेख करते हुए कहा कि उनकी शिराओं में खून की बजाय सिंदूर नहीं बल्कि राजनीति बहती है। गौरतलब है कि श्री मोदी ने ऑपरेशन सिंदूर की चर्चा करते हुए एक जनसभा में कहा था कि उनकी शिराओं में खून नहीं बल्कि सिंदूर बहता है।
श्रीमती घोष ने कहा कि पहलगाम में प्रशासन और खुफिया तंत्र विफल रहा जिसकी वजह से यह घटना हुआ। उन्होंने कहा कि यह सरकार सिर्फ हिंदू -मुस्लिम की बातें करती है जबकि पहलगाम में सभी धर्मों के लोग मारे गये थे। उन्होंने कहा कि सरकार पाकिस्तान से लगी सीमा पर बसे गांवों की सुरक्षा की गारंटी क्यों नहीं लेना चाहती।
द्रमुक के तिरूची शिवा ने चर्चा में भाग लेते हुए कहा कि सरकार लोकतांत्रिक परंपराओं को नहीं मानती। उन्होंने कहा कि विपक्ष ने ऑपरेशन सिंदूर के बाद सरकार का साथ दिया और जो प्रतिनिधिमंडल विदेश गये उनमें कई विपक्षी दलों के नेता भी साथ गये लेकिन सरकार ने विपक्ष की इस मसले पर चर्चा के लिए संसद का विशेष सत्र बुलाने की मांग नहीं मानी।
श्री शिवा ने कहा कि प्रधानमंत्री सदन मेें नहीं रहते यह लोकतांत्रिक परंपराओं का अपमान है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री पहलगाम हमले के बाद बिहार गये और वहां जाकर पाकिस्तान के खिलाफ कदम उठाने का ऐलान किया। प्रधानमंत्री विदेशी दौरों पर भी गये लेकिन सदन में उनकी उपस्थिति कम देखी गयी। यह लोकतंत्र के खिलाफ है।
द्रमुक नेता ने कहा कि पहलगाम हमले के बाद सिंधु जल संधि को स्थगित करने का फैसला ठीक नहीं था। उन्होंने कहा यह फैसला नागरिकों के खिलाफ था। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान सरकार की नीति पर वहां के नागरिकों को प्रताड़ित करना ठीक नहीं। उन्होंने कहा कि इससे आतंकवादी गतिविधियों को और बढ़ावा मिलेगा।
