इंदौर: हम जो भी कर्म करें, पूरी श्रद्धा, उमंग और उत्साह के साथ करें. समाज में आदिकाल से देवता और राक्षसों के बीच संग्राम होते आ रहा है, वैसा ही हमारे मन में भी देवीय और आसुरी प्रवृत्तियां हमेशा एक-दूसरे से लड़ती रहती हैं. जैसे शरीर की बीमारियों के लिए डाक्टर और वैद्य की जरूरत होती है, वैसे ही मन की बीमारियों के लिए भी सत्संग की जरूरत होती है.
जब भी, जो भी कर्म करें पूरी श्रद्धा, उत्साह और प्रसन्नता के साथ करें. मन मारकर करेंगे तो सफलता नहीं मिलेगी.ये विचार हैं, राम जन्मभूमि न्यास अयोध्या के न्यासी एवं युगपुरुष स्वामी परमानंद गिरि महाराज के, जो उन्होंने शनिवार को खंडवा रोड स्थित अखंड परम धाम आश्रम पर चल रहे 29वें ध्यान एवं योग शिविर के छठे दिन उपस्थित भक्तों को आशीर्वचन देते हुए व्यक्त किए.
