सरकार पर दस हजार की कॉस्ट


जबलपुर: मप्र हाईकोर्ट ने एक मामले में अहम व्यवस्था देते हुए कहा की नियमानुसार अनुकंपा नियुक्ति में पात्रता परीक्षा की अनिवार्यता की छूट है। इस मत के साथ जस्टिस विवेक अग्रवाल व जस्टिस विवेक जैन की युगलपीठ ने पूर्व में दिए एकलपीठ के उस निर्णय को सही करार दिया जिसमें याचिकाकर्ता को अनुकंपा नियुक्ति देने कहा गया था। कोर्ट ने सरकार पर दस हजार रुपए की कॉस्ट भी लगाई जोकि याचिकाकर्ता के खाते में जमा कराने के निर्देश दिये गये है।

सतना निवासी साक्षी परिहार की ओर से अधिवक्ता बृजेंद्र मिश्रा ने पक्ष रखा। उन्होंने बताया कि याचिकाकर्ता के पिता सहायक शिक्षक के पद पर पदस्थ थे। वर्ष 2015 में उनकी मृत्यु हो गई। याचिकाकर्ता ने अनुकंपा नियुक्ति के लिए आवेदन किया। विभाग द्वारा आवेदन निरस्त करने पर हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई। हाईकोर्ट ने जुलाई 2024 में याचिका स्वीकार करते हुए विभाग को अनुकंपा नियुक्ति देने कहा था। इस पर सरकार ने हाईकोर्ट में अपील पेश कर दी। जिसके बाद न्यायालय ने उक्त निर्देश दिये।

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