नयी दिल्ली, 25 जुलाई (वार्ता) संसद के मानसून सत्र का पहला सप्ताह ऑपरेशन सिंदूर पर चर्चा तथा बिहार में मतदाता सूची विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) की प्रक्रिया रोकने की मांग पर अड़े विपक्ष के हंगामे की भेंट चढ़ गया और राज्य सभा में सोमवार को एक विधेयक के पारित होने के अलावा दोनों सदनों में कोई विधायी कामकाज नहीं हो सका।
राज्य सभा में विभिन्न विपक्षी दलों के सदस्यों ने लगातार चौथे दिन शुक्रवार को भी बिहार में मतदाता सूची विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया, बंगाली आव्रजकों के साथ विभिन्न राज्यों में भेदभाव और छत्तीसगढ़ में औद्योगीकरण का वन क्षेत्रों पर प्रभाव जैसे मुद्दों पर तत्काल चर्चा कराने की मांग को लेकर जोरदार हंगामा किया। इसके कारण सदन की कार्यवाही पहले 12 बजे तक और बाद में सोमवार तक स्थगित कर दी गयी।
मानसून सत्र के पहले सप्ताह में राज्यसभा में सोमवार को छोड़कर किसी भी दिन विधायी कामकाज नहीं हो सका तथा पूरा सप्ताह हंगामे की भेंट चढ़ गया।
राज्यसभा में पहले स्थगन के बाद पीठासीन उप सभापति घनश्याम तिवाड़ी ने 12 बजे प्रश्नकाल की कार्यवाही शुरू करते हुए प्रश्न पूछने के लिए डॉ के लक्षमण का नाम पुकारा, विपक्षी सदस्यों ने हंगामा शुरू कर दिया। कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान के जवाब देने के लिए खड़े होते ही विपक्ष के सदस्यों ने नारेबाजी तेज कर दी।
इस बीच, कांग्रेस और अन्य दलों के सदस्य आसन के सामने आकर जोर-जोर से नारेबाजी करने लगे। हंगामा बढ़ता देख पीठासीन उप सभापति ने कार्यवाही सोमवार तक के लिए स्थगित कर दी।
इससे पहले उप सभापति हरिवंश ने सुबह कार्यवाही शुरू होने पर प्रख्यात अभिनेता कमल हासन सहित चार नवनिर्वाचित सांसदों को राज्यसभा की सदस्यता की शपथ दिलायी।
इस तरह मानसून सत्र के पहले सप्ताह में राज्य सभा में पहले दिन को छोड़कर किसी भी दिन कोई विधायी कामकाज नहीं हो सका तथा बाद के चार दिन हंगामे की भेंट चढ़ गये।
लोक सभा की कार्यवाही भी विपक्ष के हंगामे के कारण पहले अपराह्न दो बजे तक और बाद में दिन भर के लिए स्थगित कर दी गयी। अध्यक्ष ओम बिरला ने पूर्वाह्न 11 बजे जैसे ही सदन की कार्यवाही शुरू की, विपक्षी दलों के सदस्य हाथों में तख्तियां लेकर नारे लगाते हुए सदन के बीचो-बीच आकर हंगामा करने लगे। उन्होंने हंगामे के बीच ही सदन चलाने का प्रयास किया।
अध्यक्ष ने हंगामा कर रहे सदस्यों से कहा कि वे सुनियोजित तरीके से सदन की कार्यवाही में बाधा डाल रहे हैं। विपक्ष के सदस्य जानबूझकर सदन नहीं चलने दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि समस्या के समाधान का रास्ता मिलजुल कर निकाला जा सकता है।
श्री बिरला ने कहा कि वह सरकार के प्रतिनिधियों को बुलाकर विपक्ष के नेताओं के साथ वार्ता कर समस्या का समाधान निकाल सकते हैं, लेकिन इसके लिए चर्चा करनी होगी और जानबूझकर सदन में बाधा डालने की प्रवृत्ति छोड़नी होगी। उन्होंने कहा कि गतिरोध दूर करने के लिए सभी को आपस में बात करनी चाहिए और सदन चलना चाहिए, क्योंकि देश में विभिन्न संसदीय क्षेत्रों की 20-20 लाख की आबादी ने एक-एक सदस्य से अपने भविष्य की योजनाओं के लिए आस लगायी है और उन्हें उम्मीद रहती है कि संसद में उनके प्रतिनिधि उनके हित के लिए काम करेंगे।
हंगामा कर रहे सदस्यों ने उनकी एक नहीं सुनी और हंगामा बढ़ने लगा तो श्री बिरला ने सदन की कार्यवाही अपराह्न दो बजे तक के लिए स्थगित कर दी।
कार्यवाही पुन: शुरू होने पर कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एसपी) और अन्य विपक्षी दलों के सदस्य बिहार में जारी एसआईआर प्रक्रिया को वापस लेने की मांग करते हुए नारेबाजी और शोरशराबा करने लगे। कुछ विपक्षी सदस्य हाथों में तख्तियां लिये थे, जिन पर एसआईआर के विरोध में नारे लिखे हुए थे। कई सदस्य सदन के बीचो-बीच आकर हंगामा और नारेबाजी कर रहे थे।
पीठासीन अधिकारी जगदम्बिका पाल ने हंगामा कर रहे सदस्यों से कहा कि इससे किसी को लाभ नहीं हो रहा है, जिस जनता ने उन्हें चुनकर भेजा है, उसे इससे क्या लाभ होगा? जनता ने सदस्यों को यहां अपनी समस्याओं और कठिनाइयों के बारे में चर्चा करने और उन्हें दूर करने का प्रयास करने के लिए भेजा है। उन्होंने कहा कि लोकसभा अध्यक्ष ने भी कहा है कि विपक्षी सदस्य जिस भी मुद्दे पर चर्चा करना चाहते हैं, वह सरकार के प्रतिनिधियों से उनकी बात करवाकर उस पर चर्चा करवाने का प्रयास करेंगे। हंगामा कर रहे सदस्यों को सदन की कार्यवाही चलने देनी चाहिए।
इस बीच, संसदीय कार्य मंत्री अर्जुन मेघवाल ने कहा कि गोवा में अनुसूचित जनजाति के लोगों को विधानसभा में प्रतिनिधित्व देने से संबंधित महत्वपूर्ण विधेयक कार्यसूची में है, उस पर चर्चा की जानी है। उन्होंने कहा कि सरकार हर विषय पर चर्चा कराने को तैयार है। सरकार हर मुद्दे का जवाब देने को तैयार है। विपक्षी सदस्यों को सदन की कार्यवाही चलने देनी चाहिए।
श्री पाल ने कहा कि वह फिर आग्रह कर रहे हैं कि सरकार जब हर मुद्दे पर चर्चा कराने और जवाब देने को तैयार है, तो विपक्षी सदस्यों को कार्यवाही चलने देनी चाहिए।
उनकी अपील का विपक्षी सदस्यों पर कोई असर नहीं हुआ और वे हंगामा करते रहे। इस पर उन्होंने कार्यवाही सोमवार तक के लिए स्थगित कर दी।
लोक सभा में सत्र के पहले सप्ताह में विपक्ष के हंगामे के कारण लगातार पांच दिन तक कोई विधायी कार्य नहीं हो सका।
