तपती गर्मी से असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों को बचाने की याचिका पर केंद्र, राज्य सरकारों को नोटिस

नयी दिल्ली, 23 जुलाई (वार्ता) उच्चतम न्यायालय ने झुलसा देने वाली गर्मी और उसकी वजह से होने वाली मौतों से असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों को बचाने के व्यापक उपाय करने के लिए आवश्यक निर्देश देने की मांग वाली एक याचिका पर बुधवार को केंद्र तथा राज्य सरकारों को नोटिस जारी किया।

मुख्य न्यायाधीश बी आर गवई और न्यायमूर्ति के विनोद चंद्रन और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ ने आदिल शरफुद्दीन की याचिका पर विचार की सहमति व्यक्त करते हुए इस पर आदेश पारित किया।

अधिवक्ता शरफुद्दीन ने अनुच्छेद 32 के तहत दायर अपनी याचिका में इस बात पर ज़ोर दिया गया है कि दिल्ली में 2021 के बाद से सबसे ज़्यादा तापमान दर्ज किया गया है। इसलिए इस मामले में बचाव के जरूरी उपाय की जाने चाहिए। उन्होंने अपनी याचिका में केंद्र और राज्य सरकारों को कुछ बिंदुओं पर निर्देश देने की मांग की है। उनमें बाध्यकारी राष्ट्रीय ताप संरक्षण नियम तैयार करना और उन्हें लागू करना, अंतरएजेंसी और अंतरराज्यीय समन्वय, उल्लंघनों की निगरानी और गर्मी से संबंधित मौतों पर नज़र रखने के लिए न्यायालय की देखरेख में एक उच्चस्तरीय निगरानी समिति का गठन,

अत्यधिक गर्मी से संबंधित मौतों और प्रभावितों के लिए एक मुआवज़ा तंत्र शुरू करने और आपदा प्रबंधन अधिनियम 2005 के अंतर्गत राज्य ताप कार्य योजनाओं का एकीकरण, काम करने के लिए संशोधित समय, सुरक्षात्मक सुविधाएँ और अत्यधिक गर्मी के कारण स्थगित कार्य के दौरान मजदूरी की गारंटी शामिल है।

 

 

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