नयी दिल्ली, 23 जुलाई (वार्ता) देश की छोटी फर्मों को वैश्विक व्यापार में उनके सामूहिक हितों पर किसी अनुचित व्यवहार के कारण होने वाले हानिकारक प्रभाव के निराकरण के लिए वाणिज्य विभाग की ओर से उन्हें संगठित होने का सुझाव दिया गया है।
विभाग के व्यापार उपचार महानिदेशालय (डीजीटीआर) के संयुक्त सचिव एवं महानिदेशक सिद्धार्थ महाजन ने राजधानी में ‘व्यापार उपचार और सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (एमएसएमईएस): निष्पक्ष व्यापार हेतु क्षमता निर्माण’ विषय पर पिछले दिनों हुई एक तकनीकी कार्यशाला में यह सुझाव दिया। उन्होंने कहा कि व्यापार उपचार कार्यवाहियों में अपने सामूहिक हितों का प्रभावी ढंग से प्रतिनिधित्व करने के लिए छोटी फर्मों के एकजुट होने और संघ बनाने की बड़ी जरूरत है।
कार्यशाला का आयोजन व्यापार और निवेश विधि केंद्र (सीटीआईएल), भारतीय विदेश व्यापार संस्थान द्वारा व्यापार उपचार महानिदेशालय (डीजीटीआर), वाणिज्य विभाग और भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) के सहयोग से आयोजन किया गया था। इसका मुख्य उद्देश्य सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (एमएसएमईएस) को उपलब्ध व्यापार उपचार व्यवस्थाओं के प्रति संवेदनशील बनाकर और इन प्रक्रियाओं में उनकी सक्रिय भागीदारी को बढ़ाकर उन्हें सशक्त बनाना था।
कार्यशाला में सीआईआई के अंतर्राष्ट्रीय व्यापार नीति प्रभाग के प्रधान सुमंत चौधरी ने अंतर्राष्ट्रीय व्यापार परिवेश की बढ़ती जटिलता और घरेलू उद्योग के समक्ष मौजूद व्यापार विकृतियों के समाधान में संस्थागत समर्थन की महत्वपूर्ण भूमिका पर प्रकाश डाला।
व्यापार एवं निवेश विधि केंद्र के प्रमुख, प्रो. जेम्स जे. नेदुम्परा ने एमएसएमई को विभिन्न सहायता पहलों के बारे में जानकारी दी, जिनमें सीटीआईएल में व्यापार उपचार सलाहकार प्रकोष्ठ (टीआरएसी) की स्थापना भी शामिल है। इसे व्यापार उपचार संबंधी जांचों को आगे बढ़ाने में एमएसएमई को व्यापक सहायता प्रदान करने के उद्देश्य से तैयार किया गया है।
