नयी दिल्ली, 22 जुलाई (वार्ता) उच्चतम न्यायालय ने महिलाओं पर बढ़ते क्रूर अत्याचार और ज़िंदा जलाने की हालिया घटनाओं के मामले में चिंता व्यक्त की और समाधान की दिशा में सरपंच चुनी गई महिलाओं को भी अर्ध-कानूनी कार्यकर्ता के रूप में कार्य करने का अधिकार देने का मंगलवार को प्रस्ताव किया।
न्यायमूर्ति सूर्य कांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ सुप्रीम कोर्ट वूमेन लॉयर्स एसोसिएशन की रिट याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि लगातार हो रहे हमलों के मामलों को सुनकर उसे ‘शर्मिंदी’ महसूस होती है।
याचिका में महिलाओं की सुरक्षा के लिए अखिल भारतीय सुरक्षा दिशानिर्देश, गिरफ्तारी होने पर यौन अपराधियों का अनिवार्य रासायनिक बधियाकरण, तत्काल पॉलीग्राफ परीक्षण, आजीवन कारावास और जघन्य दुष्कर्म एवं हत्या के मामलों में स्थायी बधियाकरण जैसे सुधारों की मांग की गई है।
याचिका में सभी महिलाओं के लिए सुलभ राष्ट्रीय यौन अपराधी रजिस्ट्री स्थापित करने की भी मांग की भी गई है। सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति कांत ने प्रस्ताव दिया कि पंचायत आरक्षण के तहत सरपंच चुनी गई महिलाओं को भी अर्ध-कानूनी कार्यकर्ता के रूप में कार्य करने का अधिकार दिया जा सकता है।
शीर्ष अदालत में संबंधित पक्षों की दलीलें सुनीं और केंद्र सरकार का जवाबी हलफ़नामा रिकॉर्ड में न होने पर मामले की सुनवाई गुरुवार तक के लिए स्थगित कर दी।
