
जबलपुर। मप्र हाईकोर्ट ने मप्र लोक सेवा आयोग को निर्देशित किया है कि राज्य सेवा परीक्षा 2015 की मुख्य परीक्षा का पूरा शेड्यूल पेश करें। इसके बाद ही कोर्ट मुख्य परीक्षा के आयोजन संबंधी मांग पर विचार करेगी। चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा व जस्टिस विनय सराफ की युगलपीठ ने मामले पर अगली सुनवाई 5 अगस्त को निर्धारित की है। दरअसल, हाईकोर्ट ने 2 अप्रैल को कहा था कि कोर्ट की अनुमति बिना मुख्य परीक्षा का आयोजन नहीं किया जाए।
भोपाल निवासी सुनीत यादव सहित अन्य की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता रामेश्वर सिंह ठाकुर व विनायक प्रसाद शाह ने पक्ष रखा। उन्होंने दलील दी कि मप्र लोक सेवा आयोग ने कुल 158 पदों की भर्ती के लिए पांच मार्च 2025 को प्रारंभिक परीक्षा परिणाम घोषित किया था। इसमें वर्गवार कट-आफ अंक जारी नहीं किए गए हैं। जबकि पूर्व की सभी परीक्षाओं में वर्गवार कट-ऑफ अंक जारी किया जाता रहा है। सुप्रीम कोर्ट एवं हाईकोर्ट के विभिन्न फैसलों को बायपास करते हुए आयोग अनारक्षित पदों के विरुद्ध आरक्षित वर्ग के प्रतिभावान अभ्यर्थियों को मुख्य परीक्षा के लिए चयनित नहीं कर रहा है। सभी अनारक्षित पद सामान्य वर्ग के लिए आरक्षित करके प्रारंभिक परीक्षा का रिजल्ट घोषित किया गया है। मप्र लोक सेवा आयोग ने इस त्रुटि को छिपाने के लिए 2025 के प्रारंभिक परीक्षा में कट-ऑफ माक्र्स भी जारी नहीं किए हैं। मामले पर सोमवार को सुनवाई के दौरान राज्य शासन की ओर से स्थगन हटाने का आवेदन पेश किया गया। इस पर न्यायालय ने कहा कि हमने रोक तो नहीं लगाई है। न्यायालय ने कहा कि पहले मुख्य परीक्षा का कार्यक्रम पेश करें, उसके बाद आवेदन पर विचार किया जाएगा। पिछली सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने कहा था कि जब राज्य सेवा परीक्षा की प्रारंभिक परीक्षा में गड़बडिय़ां हैं, तो यदि मुख्य परीक्षा की की अनुमति देंगे, तो गड़बडिय़ां 10 गुना हो जाएंगी। युगलपीठ ने मप्र लोक सेवा आयोग को निर्देशित किया था कि राज्य सेवा परीक्षा की प्रारंभिक परीक्षा के वर्गवार कट-आफ मार्क्स जारी करे।
