
खजुराहो। विश्व प्रसिद्ध पर्यटन नगरी खजुराहो में सावन के दूसरे सोमवार को शिवभक्ति का अद्भुत संगम देखने को मिला। सुबह से ही श्रद्धालुओं की टोलियाँ पारंपरिक वेशभूषा में मतंगेश्वर महादेव मंदिर की ओर बढ़ती रहीं। चंदेलकालीन स्थापत्य का यह ऐतिहासिक शिवालय शिवभक्तों से भरा रहा।श्रद्धालुओं ने शिवसागर तालाब में स्नान कर शिवलिंग का जलाभिषेक किया और भस्म, भांग, बेलपत्र, शमी पत्र व आंक के फूल अर्पित किए। सुबह की महाआरती से लेकर शाम तक मंदिर परिसर में हर ओर बम-बम भोले की गूंज सुनाई देती रही।
ग्रामीण अंचलों से आईं महिलाएं, लमटेरा गीतों से गूंजा परिसर
ग्रामीण क्षेत्रों से आईं महिलाओं ने पारंपरिक लमटेरा गीत गाते हुए महादेव का आह्वान किया। गीतों में महिलाएं महादेव को आत्मीय स्वर में पुकारती रहीं “महादेव बाबा ऐसे जो मिले रे, जैसे मिल गए महतारी और बाप”। यह बुंदेलखंडी संस्कृति और श्रद्धा का गहरा प्रतीक रहा।
1101 शिवलिंगों का विशेष मंदिर: दूल्हादेव
खजुराहो का दूसरा प्रमुख शिवालय दूल्हादेव मंदिर भी इस अवसर पर श्रद्धालुओं से गुलजार रहा। गाइड आशाराम ने बताया कि यह मंदिर नदी तट पर स्थित है और इसमें 1100 छोटे शिवलिंगों के साथ एक मुख्य शिवलिंग स्थित है। मान्यता है कि यहां पूजा करनेसे 1101 शिवलिंगों के पूजन का फल प्राप्त होता है। नवविवाहित जोड़े विशेष रूप से यहां आकर आशीर्वाद लेते हैं।
पूजन सामग्री के हाट मेले में रही चहल-पहल
मंदिर प्रांगण के बाहर एक छोटा हाट मेला भी लगा, जिसमें 15 से 20 दुकानों पर पूजन सामग्री उपलब्ध रही। दुकानदार मोनू ने बताया कि बेलपत्र, धतूरा, शमी पत्र, गुलाब, गेंदे आदि की टोकरी 10 से 50 रुपए तक की कीमत में बिक रही थी। श्रद्धालुओं ने जल चढ़ाने के लिए 10 रुपए में लोटा किराए पर लेकर भगवान शिव का अभिषेक किया।
