जीनियस कानून से मजबूत होगा डॉलर, भारत पर भी पड़ेगा असर

नयी दिल्ली, 19 जुलाई (वार्ता) अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शुक्रवार को ‘गाइडिंग एंड इस्टेब्लिशिंग नेशनल इनोवेशन फॉर यू.एस. स्टेबलकॉइन्स’ (जीनियस) एक्ट पर हस्ताक्षर कर दिये। इससे देश में स्टेबलकॉइन्स को आधिकारिक मान्यता मिल गयी है।

स्टेबलकॉइन क्रिप्टो करेंसी की वह श्रेणी है जिसका मूल्य डॉलर या सोने जैसी किसी अपेक्षाकृत स्थिर एसेट के आधार पर निर्धारित होता है। इसलिए, इसमें बिटकॉइन तथा ऐसी अन्य क्रिप्टोकरेंसी की तरह बड़ा उथल-पुथल देखने को नहीं मिलता है।

इस कानून के लागू होने के दो बड़े प्रत्यक्ष प्रभाव होंगे। एक रिजर्व के रूप में डॉलर की मांग बढ़ेगी और दूसरा अमेरिकी ट्रेजरी बॉन्ड मजबूत होगा। ऐसा इसलिए, क्योंकि कानून में यह प्रावधान है कि स्टेबलकॉइन जारी करने वालों को शत-प्रतिशत लिक्विड एसेट का रिजर्व बनाना होगा। वे अमेरिकी डॉलर या अल्पावधि वाले ट्रेजरी बॉन्ड का रिजर्व तैयार कर सकते हैं। ग्राहकों के हितों की रक्षा के लिए हर महीने रिजर्व का खुलासा करना अनिवार्य होगा। कानून में धोखाधड़ी रोकने के उपाय भी किये गये हैं।

इस कानून से राष्ट्रपति ट्रंप ने निजी और देश हित दोनों को साधने का प्रयास किया है। पिछले कुछ समय में उनके पारिवारिक कारोबार ने स्टेबलकॉइन में अधिक रुचि दिखायी है। वहीं, हाल के समय में अमेरिकी डॉलर से इतर दूसरी मुद्राओं में अंतर्राष्ट्रीय व्यापार बढ़ने के प्रभाव को समाप्त करने में भी इससे मदद मिलेगी। यही कारण है कि संसद में इस विधेयक को दोनों दलों का समर्थन मिला।

डॉलर की मजबूती और अमेरिकी ट्रेजरी बॉन्ड की मांग का असर भारत पर भी पड़ेगा। इस विधेयक के अमेरिकी संसद में आने के बाद से ही विदेशी निवेशक भारतीय बाजार से पैसा निकालने लगे थे। डॉलर के मजबूत होने से रुपये पर दबाव पड़ेगा क्योंकि भारत का ज्यादातर विदेशी व्यापार अब भी डॉलर में ही होता है और भारत शुद्ध आयातक देश है।

व्हाइट हाउस की फैक्ट शीट में दावा किया गया है कि जीनियस कानून से अमेरिका दुनिया की क्रिप्टो राजधानी बन जायेगा।

अमेरिकी संसद ने जीनियस विधेयक के साथ इससे जुड़े दो अन्य विधेयकों को भी मंजूरी दी है। इनमें एक है एंटी-सेंट्रल बैंक डिजिटल करेंसी विधेयक जो अमेरिकी फेडरल रिजर्व को डिजिटल करेंसी जारी करने से रोकता है। आशंका जताई जा रही थी कि यदि फेडरल रिजर्व डिजिटल करेंसी जारी करता है तो उसमें सरकारी निगरानी ज्यादा होगी जो अच्छी बात नहीं है।

दूसरा संबंधित विधेयक है डिजिटल एसेट मार्केट क्लैरिटी एक्ट। यह कानून डिजिटल एसेट के बारे में कोमोडिटी फ्यूचर ट्रेडिंग कमीशन और सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज कमीशन के बीच अधिकार क्षेत्र को परिभाषित करता है।

अमेरिकी संसद की प्रतिनिधि सभा में जीनियस बिल 308 बनाम 122 मतों से पारित हुआ। इसे लगभग आधे डेमोक्रेटिक सदस्यों और अधिकांश रिपब्लिकन का समर्थन प्राप्त था।

 

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