जिलाध्यक्ष के निर्वाचन में ज्यादातर जगह तय नाम ही हुए घोषित
सतना:सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी को पहली बार संगठन चुनाव में न सिर्फ काफी सतर्कता बरतनी पड़ी,बल्कि निचले स्तर पर व्याप्त गुटबाजी को हावी होने से पहले भी समीकरणों में संतुलन बनाकर आने वाले समय के लिए उचित नेता का चयन करने के लिए विवश होना पड़ा.हालांकि पार्टी के इस प्रकार के फैसले से एक बड़ा वर्ग काफी असंतुष्ट दिखाई दे रहा है.उल्लेखनीय है कि वर्तमान में देश के सबसे बड़े राजनैतिक दल होने का सम्मान हासिल करने वाली भारतीय जनता पार्टी में प्रारम्भिक काल में संगठन चुुनावों को कार्यकत्र्ता उत्सव के रूप में लेता था.
महीनों चलने वाली यह प्रक्रिया निचले स्तर से प्रारम्भ होकर लोकतांत्रिक ढग़ से आगे तक पहुचती थी.जिलाध्यक्ष के लिए भी बकायदे वोट डाले जाते थे.इसके बाद चुनाव अधिकारी मतों की गिनती के बाद जीत की घोषणा करता था.अब जबकि सबकुछ बदल गया है.रायशुमारी के बाद मंडल अध्यक्षों की घोषणा राजधानी के कार्यालय से होती है.तो जिलाध्यक्षों के मामले में निर्णय स्थानीय स्तर पर होगा यह कह पाना सम्भव नहीं है.फिर भी भाजपा संगठन ने इस बार सावधानी से कदम उठाते हुए विन्ध्य में घोषणा के बाद किसी प्रकार के विरोध की स्थिति न पैदा हो इसका विशेष ध्यान रखा.
विन्ध्य के सबसे महत्वपूर्ण सतना,रीवा और सीधी जिले के समीकरणों में ज्यादा परिर्वतन न करते हुए विन्ध्य में असन्तुष्ट चल रहे वैश्य समाज को अवसर देते हुए पूर्व महापौर ऊर्जावान नेता वीरेन्द्र गुप्ता को जिलाध्यक्ष का दायित्व सौपा गया.हालांकि यहां पहले पिछडा वर्ग से डां अजय सिंह जिलाध्यक्ष बनाए गए थे.उनकी अध्यक्षीय कार्यकाल में भाजपा ने लोकसभा और विधानसभा की सात सीटें जीतने में सफलता हासिल की थी.फिर भी पार्टी ने जाति संतुलन को ध्यान में रखते हुए उपमुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ला के करीबी रहे.
श्री गुप्ता को जिले का नेतृत्व करने का अवसर सौपा गया है.इसी प्रकार विन्ध्य से इसी समुदाय से दूसरे जिलाध्यक्ष के रूप में नवगठित जिला मैहर के जिलाध्यक्ष के रूप में कमलेश सुहाने को सेवावृद्धि प्रदान की गई है.क्षत्रिय समाज के महत्व को समझते हुए पार्टी ने सीधी जिलाध्यक्ष के रूप में देवकुमार सिंह चौहान को जिम्मा सौंपा है. सिंगरौली जिला का जिम्मा आरक्षित कोटे के सुन्दरलाल शाह को देकर पार्टी ने नई परम्परा की शुरुआत की. सतना, मऊगंज और पन्ना जिले की कमान ब्राम्हण नेताओं के हाथ में सौंपी गई है. सतना में पूर्वगामी राजनैतिक समीकरणों को कायम रखते हुए भगवती प्रसाद पाण्डेय को जिम्मा सौंपा गया है जबकि पन्ना व मऊगंज में ब्रजेन्द्र मिश्रा व डा. राजेन्द्र मिश्रा को आगामी दो वर्षों के लिए सेवावृद्धि प्रदान कर पार्टी संगठन ने जिले के नेतृत्व का जिम्मा उन्हीं को सौंप कर एक बार फिर उनके प्रति विश्वास जताया है
