केंद्रीय औद्योगिक उद्योगों में नयी उभरती प्रौद्योगिकियों को अपनाए जाने पर बल

नयी दिल्ली, 19 जुलाई (वार्ता) लोक उद्यम विभाग ने ऊर्जा, बिजली, दूरसंचार और निर्माण जैसे विभिन्न क्षेत्रों में कारोबार कर रहे केन्द्र सरकार के उपक्रमों को कृत्रिम मेधा (एआई), इंटरनेंट ऑफ द दिंग्स (आईओटी) और थ्री डी प्रिंटिंग जैसी चौथी पीढ़ी की उभरती औद्योगिकी प्रौद्योगिकियों के प्रयोग पर ध्यान देने को कहा है।
विभाग आने वाले समय में इन उपक्रमों के साथ लक्ष्य और कार्यनिष्पादन संबंधी वार्षिक समझौता ज्ञापनों (एमओयू)की मूल्यांकन व्यवस्था में उद्योग 4.0 (इंटरनेट और डिजिटल प्रौद्योगिकी आधारित विनिर्माण) को करने पर भी विचार किया जा रहा है। सरकार का मानना है कि इसके वैश्विक बाजार में प्रतिस्पर्धा करने की इनकी क्षमता बढ़ाने में मदद मिलेगी।
विभाग के सचिव के. मोसेस चलई ने देश में चौथी औद्योगिक क्रांति (चौथी पीढ़ी की विनिर्माण प्राद्योगिकी वाली औद्योगिक क्रांति) को राष्ट्रीय मिशन के रूप में अपनाने के महत्व पर बल दिया। वह उद्योग 4.0 पर एक कार्यशाला का उद्घाटन कर रहे थे। विभाग ने इसका आयोजन राष्ट्रीय राजधानी में किया। श्री चलई ने इस अवसर पर सामान्य प्रयोजन प्रौद्योगिकियों (जीपीटी) पर संक्षेप में प्रकाश डाला। कार्यशाला में ऊर्जा, बिजली, निर्माण, बुनियादी ढांचा, दूरसंचार और सेवा जैसे क्षेत्रों में उद्योग 4.0 प्रौद्योगिकियों को अपनाने और उनका विस्तार करने की रणनीतियों पर चर्चा करने के लिए केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों के विशेषज्ञों, नीति निर्माताओं और नेतृत्व को एक साथ लाया गया।
श्री चलई ने कार्य में सभी विभागों में समन्वय की ‘संपूर्ण सरकार’ वाली सोच की तर्ज पर एक -‘संपूर्ण लोक उपक्रम’ के दृष्टिकोण की आवश्यकता पर बल दिया और सभी सीपीएसई से अपने कार्यों में एआई, आईओटी, डिजिटल ट्विन्स, थ्री डी प्रिंटिंग और 5जी-सक्षम स्मार्ट बुनियादी ढांचे जैसे 4 चौथी पीढ़ी की औद्योगिक क्रांति की सक्षमकर्ताओं को एकीकृत करने में सहयोग करने का आग्रह किया।
उन्होंने कहा कि उद्योग 4.0 को भविष्य में सीपीएसई समझौता ज्ञापन मूल्यांकन ढांचे में शामिल करने पर भी विचार किया जा रहा है और इसे शीघ्र अपनाना वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाने के लिए महत्वपूर्ण होगा।
परिनियोजन विशेषज्ञ ए. आनंद ने एक प्रस्तुति में भारत के प्रथम 5जी लैब्स और थ्री डी प्रिंटिंग सेंटर्स ऑफ एक्सीलेंस से प्राप्त जानकारी के आधार पर, विभिन्न उद्योग क्षेत्रों में डिजिटल डिजाइनिंग, रिवर्स इंजीनियरिंग और थ्री डी प्रिंटिंग के अनुप्रयोगों और क्षेत्रीय परिनियोजन में अपने समृद्ध अनुभव को साझा किया।
स्कूल ऑफ प्लानिंग एंड आर्किटेक्चर ( एसपीए) के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. प्रभजोत सिंह सुग्गा ने बुनियादी ढांचे, संयंत्र प्रबंधन और आपदा लचीलेपन में डिजिटल ट्विन प्लेटफार्मों की परिवर्तनकारी क्षमता पर प्रकाश डाला।एआई विशेषज्ञ विदुषी चतुर्वेदी ने पूर्वानुमानात्मक विश्लेषण, संसाधन अनुकूलन और बुद्धिमान निर्णय लेने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और मशीन लर्निंग का लाभ उठाने पर बात की।
इस अवसर पर पावरग्रिड, एचएससीसी और बीएसएनएल जैसे सीपीएसई द्वारा आयोजित अनुभव-साझाकरण सत्रों में एआई-संचालित रखरखाव, डिजिटल सिमुलेशन और थ्री डी प्रिंटिंग-सक्षम आपूर्ति श्रृंखलाओं में सफल प्रायोगिक कार्यों का प्रदर्शन किया गया।
कार्यशाला में एनटीपीसी, एनएचपीसी, गेल, कॉनकॉर, आईआरसीटीसी, राइट्स, एएआई और वैपकोस सहित प्रमुख सीपीएसई के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशकों और निदेशकों ने सक्रिय भागीदारी की।
मंत्रालय की एक विज्ञप्ति के अनुसार विचार-विमर्श ने तेल एवं गैस, रेलवे, खनन, स्वास्थ्य, हथकरघा और बुनियादी ढांचे जैसे प्रमुख क्षेत्रों में 4 आईआर प्रौद्योगिकियों की प्रासंगिकता की पुष्टि की। यह कार्यक्रम के दौरान साझा किए गए डीपीई अवधारणा पत्र और अपनाने की क्षमता मैट्रिक्स में उल्लिखित है।

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