पाकिस्तान के झूठे वादों की खुली पोल: नीरज चोपड़ा से आगे निकले अरशद नदीम ने खुद किया सरकारी ‘धोखे’ का पर्दाफाश

स्टार एथलीट ने बताया, ‘सरकार ने वादे किए, लेकिन कुछ भी नहीं मिला’; सम्मान के अभाव और उपेक्षा पर छलका दर्द

 

नई दिल्ली, 18 जुलाई, 2025 – पाकिस्तान के स्टार भाला फेंक एथलीट अरशद नदीम, जिन्होंने टोक्यो ओलंपिक में भारत के नीरज चोपड़ा को कड़ी टक्कर दी थी, ने अपने देश की सरकार के झूठे वादों और उपेक्षा का पर्दाफाश किया है। नदीम ने हाल ही में खुलासा किया है कि उनकी ओलंपिक सफलता और राष्ट्रीय रिकॉर्ड बनाने के बावजूद, सरकार ने उन्हें जो वादे किए थे, उनमें से कुछ भी पूरा नहीं किया गया है। यह खुलासा पाकिस्तान में खेल और खिलाड़ियों की बदहाली की एक कड़वी सच्चाई को सामने लाता है।

अरशद नदीम ने मीडिया से बातचीत में बताया कि टोक्यो ओलंपिक में उनके शानदार प्रदर्शन और राष्ट्रीय रिकॉर्ड तोड़ने के बाद, सरकार और संबंधित खेल प्राधिकरणों ने उन्हें वित्तीय सहायता, प्रशिक्षण सुविधाएं और अन्य प्रोत्साहन देने के कई वादे किए थे। उन्होंने दुख जताते हुए कहा, “सरकार ने बड़े-बड़े वादे तो किए, लेकिन उनमें से कुछ भी नहीं मिला।” नदीम ने यह भी कहा कि उन्हें उचित प्रशिक्षण सुविधाओं की कमी का सामना करना पड़ रहा है, और उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धा करने के लिए आवश्यक समर्थन नहीं मिल रहा है। उनकी यह टिप्पणी उस समय आई है जब पाकिस्तान में खेल के बुनियादी ढांचे और एथलीटों के कल्याण को लेकर लगातार सवाल उठ रहे हैं।

लगातार उपेक्षा का शिकार हुए अरशद, आर्थिक तंगी और भविष्य की चिंता; पाकिस्तान में खेल नीति पर सवाल

अरशद नदीम ने न केवल अपनी व्यक्तिगत उपेक्षा पर बात की, बल्कि पाकिस्तान में एथलीटों को मिलने वाले सम्मान के अभाव पर भी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि विदेशों में एथलीटों को उनके प्रदर्शन के लिए सराहा जाता है और उन्हें सभी सुविधाएं प्रदान की जाती हैं, जबकि पाकिस्तान में प्रतिभाओं को अक्सर संघर्ष करना पड़ता है। नदीम का यह बयान उनकी आर्थिक तंगी और भविष्य को लेकर उनकी चिंताओं को भी दर्शाता है, क्योंकि एक अंतरराष्ट्रीय स्तर के एथलीट के लिए उचित वित्तीय और प्रशिक्षण सहायता के बिना अपने खेल को जारी रखना मुश्किल होता है।

अरशद नदीम का यह पर्दाफाश पाकिस्तान की खेल नीति और एथलीटों के प्रति सरकार के रवैये पर गंभीर सवाल खड़े करता है। एक ऐसे देश में जहाँ क्रिकेट के अलावा अन्य खेलों को अक्सर नजरअंदाज किया जाता है, नदीम जैसे ओलंपिक स्तर के एथलीट की यह कहानी दर्शाती है कि प्रतिभा होने के बावजूद, उन्हें पर्याप्त प्रोत्साहन और समर्थन नहीं मिल पा रहा है। यह घटना पाकिस्तान में युवा एथलीटों के लिए एक निराशाजनक संदेश भी भेजती है, जो अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपने देश का प्रतिनिधित्व करने का सपना देखते हैं।

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