विकास के नाम पर मध्यप्रदेश ने बेंच दिए चित्रकूट के दो घाट

डा संजय पयासी

सतना:वर्षों से विकास के नाम पर उपेक्षित वनवासी मर्यादा पुरूषोत्तम भगवान राम की तपोस्थल चित्रकूट को अयोध्या की तर्ज पर विकसित करने का सपना दिखाकर राज्य सरकार की एक ऐजन्सी ने मध्यप्रदेश सीमा में आने वाले दो महत्वपूर्ण घाटों को निजी क्षेत्र को पीपी मोड़ में फिलहाल 9 वर्षों के लिए सौंप दिया है.बकायदे सम्बंधित एजेन्सी के साथ पर्यटन विकास निगम ने अनुबन्ध कर लिया है,जबकि इसकी जानकारी चित्रकूट विकास प्राधिकरण को नहीं दी गई न ही निजी हाथों में सौपने से पूर्व किसी प्रकार की स्थानीय स्तर पर जनसुनवाई की गई.

मिली जानकारी के अनुसार बुधवार को बाकायदे अधिकृत तौर पर पर्यटन विकास निगम ने विज्ञप्ति जारी कर घाटों के विकास के लिए किए गए अनुबन्ध की जानकारी दी.इसी विज्ञप्ति के माध्यम से पहली बार यह जानकारी दी गई कि चित्रकूट डिस्टनेशनप्रोजेक्ट को भारत सरकार के स्वदेश दर्शन 2.0 में शामिल कर लिया गया है.चित्रकूट को आध्यात्मिक स्थल के साथ-साथ पर्यटक स्थल के रूप में विकसित करने की पहल इस परियोजना के माध्यम से की जाएगी.इसके पूर्व राज्य सरकार ने चित्रकूट के विकास के लिए प्रदेश स्तर पर विभिन्न विभागों को मिलाकर विकास के लिए वृहद कार्ययोजना तैयार कराई है.इसमें पर्यटन बोर्ड को भी विकास के कुछ दायित्व सौंपे गए थे.घाटों के विकास का जिम्मा नगरीय निकाय और लोक निर्माण विभाग को सौपा गया था.

अचानक हुए इस विशेष अनुबन्ध के बारे में बताया गया हैकि यह कार्यवाही में स्थानीय स्तर की कोई सहमति नहीं ली गई है.और न ही उन्हे इस जानकारी का हिस्सेदार बनाया गया है.यह अनुबन्ध मध्यप्रदेश टूरिज्म बोर्ड  और मुबई की मेसर्स सावनी हेरिटेज प्राइवेट लिमिटेड के बीच हुआ है.इस अनुबन्ध के दौरान अपर प्रबंध संचालक बिदिशा मुखर्जी की अध्यक्षता में बोर्ड की योजना शाखा के प्रमुख संयुक्त संचालक प्रशांत सिंह बघेल और सावनी  हेरिटेज कंजर्वेशन प्राइवेट लिमिटेड के जीतेश कुमार उपस्थित थे.इस अनुबन्ध को कराने में प्रोजेक्ट कंसल्टेेंट शिल्पा शर्मा,और मेसर्स आई पी ई ग्लोबल के आर्किटेक्ट निल्विन राफेल की महत्वपूर्ण भूमिका रही है.
अपर प्रबंध संचालक सुश्री मुखर्जी ने यह भी बताया है कि चित्रकूट में कलेक्टर की अध्यक्षता में डिस्टनेशन मैनेजमेन्ट कमेटी का गठन किया गया है.इसके बाद डिस्टनेशन मैनेजमेन्ट आर्गनाइजेशन की स्थापना भी की जाएगी.पीपीपी मोड़ में किए गए अनुबन्ध की अवधि अभी 9 वर्ष बताई गई है.इस दौरान घाटों का पूरा जिम्मा सम्बन्धित कम्पनी के पास होगा.
चित्रकूट के साथ हुआ फिर छलावा
विश्व प्रसिद्ध धार्मिक नगरी होने के कारण उसके आध्यात्मिक विकास को लेकर वर्षों से इस प्रकार के प्रयास किए जा रहे हैं.जो आज तक फलीभूत नहीं हो पाए.प्रदेश में भाजपा सरकार आने के बाद सबसे पहले रामपथ गमन विकास योजना बनाई गई.जिसके तहत भगवान श्रीराम कीस्मृतियों से जुड़े स्थलों का विकास किया जाना था.वर्षों तक इसमें काम चला इसके काम विन्ध्य विकास प्राधिकरण के माध्यम से किए जा रहे थे.परिणाम कुछ भी नहीं निकला.बाद में डां मोहन यादव ने प्रदेश की कमान सभालने के बाद चित्रकूट के विकास का पूर्ण आश्वासन दिया.इसके परिणाम सामने आ रहे हैं.
शिवराज ने बनाया न्यास
प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने अपने कार्यकाल के अंतिम दिनों में राम वन गमन पथ न्यास के गठन का मसौदा विधानसभा से पारित कराकर इस मामले बड़ी पहल की थी.हालांकि यह पहल कांग्रेस की कमलनाथ सरकार के लिए निर्णय का ही हिस्सा कहा जा सकता है.कमलनाथ ने मुख्यमंत्री रहते हुए राम वन गमन पथ की कार्ययोजना बनाकर इसका ट्रस्ट बनाने का निर्णय कैबिनेट से पारित किया था.इस बीच इस मामले में पडोसी राज्य छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बाघेल ने राम वन गमन पथ योजना को अमल में लाकर अपने इलाके के कई क्षेत्रों को विकास से जोडा था.जिसकी चर्चा उन दिनों राष्ट्रीय स्तर पर हो रही थी.वर्तमान में न्यास,प्राधिकरण गठन के बाद भी घाटों का संधारण निजी हाथों में दिया जाना सहज रूप से स्थानीय लोगों को हजम नहीं हो रहा.

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