लंदन, 15 जुलाई (वार्ता) भारत के कप्तान शुभमन गिल ने लॉर्ड्स टेस्ट के रोमांचक आखिरी दिन सोमवार को अपनी टीम की जुझारू कोशिशों पर गर्व जताया। लेकिन साथ ही कहा कि चौथे दिन लंच से ठीक पहले हुए पंत का रनआउट होना मैच का टर्निंग प्वाइंट था।
लंच से ठीक पहले जब भारत का स्कोर 82 पर 7 हो गया था, तब लगा कि मैच जल्दी खत्म हो जाएगा। लेकिन निचले क्रम के बल्लेबाजों ने डटकर मुकाबला किया और मैच को आखिरी सत्र तक ले गए। अंततः भारत 170 रन पर ऑल आउट हो गया और 22 रन से हार गया। इस जीत के साथ इंग्लैंड ने एंडरसन-तेंदुलकर ट्रॉफी में 2-1 की बढ़त बना ली।
गिल ने पोस्ट-मैच प्रेजेंटेशन में कहा, ”मैं बेहद गर्व महसूस कर रहा हूं। कोई भी टेस्ट मैच इससे ज्यादा करीबी नहीं हो सकता। पांच दिन तक कड़ा मुकाबला चला, जिसका फैसला आख़िरी सत्र और आखिरी विकेट गिरने के बाद आया। हमारी टीम ने इस मैच में जिस तरह का जुझारूपन दिखाया, उससे मैं बहुत खुश हूं।”
जब शोएब बशीर ने मोहम्मद सिराज को आउट कर इंग्लैंड को जीत दिलाई, तब रवींद्र जडेजा 61 रन पर नाबाद रहे। यह एक अदभुत पारी थी। उन्होंने 181 गेंदें खेलीं और निचले क्रम को बखूबी संभाला। उन्होंने नीतीश रेड्डी के साथ 30, जसप्रीत बुमराह के साथ 35 और सिराज के साथ 23 रन जोड़े।
गिल ने जडेजा के बारे में कहा, ”वह बहुत अनुभवी खिलाड़ी हैं। हमने उन्हें कोई संदेश नहीं भेजा। वह निचले क्रम के साथ शानदार बल्लेबाजी कर रहे थे। हम बस यही चाहते थे कि वह और निचले क्रम के बल्लेबाज जितना लंबा खेल सकें, खेलें।”
जब इस दिल तोड़ने वाली हार की वजह बात की गई, तो गिल ने माना कि भारत ने खुद को चौथे दिन की आखिरी घड़ी में मुश्किल में डाल दिया। चौथे दिन शाम को करुण नायर, खुद गिल और नाइटवॉचमैन आकाशदीप का विकेट काफी कम अंतराल में गिर गया था। उस समय भारत का स्कोर 41/1 से 58/4 हो गया था। गिल को लगा कि अगर शीर्ष क्रम से एक अर्धशतकीय साझेदारी मिल जाती, तो नतीजा कुछ और हो सकता था।
उन्होंने कहा, ”आखिरी एक घंटे में हम थोड़ी बेहतर बल्लेबाजी कर सकते थे। खासतौर पर जो दो आखिरी विकेट गिरे। वहां हमसे गलती हुई। आज सुबह भी, जिस तरह इंग्लैंड ने योजनाबद्ध गेंदबाजी की, हम बस एक 50 रन की साझेदारी की उम्मीद कर रहे थे। अगर टॉप ऑर्डर से एक भी साझेदारी मिल जाती, तो चीजें आसान हो जातीं।”
क्या पंत, राहुल और वाशिंगटन सुंदर के एक ही सत्र में आउट हो जाने के बाद भी कोई उम्मीद बची थी। इस सवाल के जवाब में गिल ने कहा, ”जब तक बल्लेबाजी बची थी, उम्मीद भी थी। हमें बस एक 50-60 रन की साझेदारी चाहिए थी। टारगेट बहुत बड़ा नहीं था। बस एक अर्धशतकीय साझेदारी और हम मैच में वापस आ सकते थे।”
गिल ने चौथे दिन लंच से ठीक पहले हुए पंत के रनआउट को भी मैच का टर्निंग प्वाइंट माना। पंत और राहुल ने शतकीय साझेदारी कर पहली पारी में भारत को अच्छी स्थिति में पहुंचा दिया था। लेकिन राहुल को लंच से पहले शतक दिलाने की जल्दबाजी में तेज सिंगल लेने की कोशिश की गई और पंत रन आउट हो गए। इस विकेट ने मैच का रुख पलट दिया।
गिल ने कहा, ”निश्चित रूप से वह मैच का टर्निंग प्वाइंट था। एक समय पर हमें लगा था कि अगर हम 80-100 रन की बढ़त ले लें, तो वो निर्णायक साबित हो सकती है। हमें पता था कि पांचवें दिन इस विकेट पर 150-200 रन चेज करना आसान नहीं होगा। अगर हमें वो बढ़त मिल जाती, तो हम बहुत अच्छी स्थिति में होते।”