‘प्रसूति’ में उजागर हो रही बाल विवाह की करतूतें

प्रदीप मालवीय

इन्दौर: बाल विवाह रोकने के लिए जिम्मेदार महिला एवं बाल विकास विभाग की अक्षमता, नाकामी के चलते शासकीय चिकित्सालयों में प्रसूति के दौरान कागजी कार्रवाई में बाल विवाह की करतूतें उजागर हो रही है.पिछले दो माह में जिला अस्पताल प्रशासन ने कम उम्र में प्रसूति संबंधी आधा दर्जन से अधिक प्रकरण विभिन्न थानों की पुलिस को सौंपे है. प्रसव के लिए आने वाली युवती की उम्र का निर्धारण उसके आधार कार्ड से किया जाता है, जो अब इन युवतियों के परिवारों की पोल भी खोल रहा है.

महिला एवं बाल विकास विभाग की चौकस निगाहों के बीच कुछ लोग अपनी अवयस्क पुत्रियों का विवाह कर देते हैं, जिसकी पोल उनकी ब्याहता बालिकाओं द्वारा गर्भधारण से खुल रही है. धार रोड पर स्थित पं. गोविंद वल्लभ पंत शासकीय जिला चिकित्सालय में प्रसव के लिए रोजाना महिलाओं का पंजीयन होता है. प्रसव का पंजीयन करने के लिए आधार कार्ड को आधार बनाया जाता है.

मेडिकल जांच के दौरान जब आधार की फोटोकापी मांगी जाती है, उस समय प्रसूता की उम्र उजागर होती है. पिछले दो माह के दौरान जिला अस्पताल में ही आठ से दस प्रकरण उजागर होने के बाद नर्सिंग स्टाफ की इंजार्च ने ऐसी प्रसूताओं को चिन्हित कर पुलिस को अग्रिम कार्रवाई हेतु जानकारी प्रेषित की है. इनमें चंदन नगर थाना क्षेत्र से सर्वाधिक मामले सामने आए हैं. गांधी नगर, द्वारापुरी, एरोड्रम आदि थानों को भी बकायदा पत्र लिखकर तदाशय की जानकारी दी गई है. इसमें प्रसूति के लिए पंजीकृत की गई लड़की की उम्र, पता और उसके परिजन का ब्यौरा दिया गया है.

आधार कार्ड से पता चल रही उम्र
गौरतलब है कि शासकीय अस्पतालों में प्रसूताओं को शासन की तरफ से कई योजनाओं का लाभ दिया जाता है. इसमें सोलह हजार रुपए तक की आर्थिक मदद भी मिलती है. प्रसव के पूर्व इन महिलाओं को कई जांचों से गुजरना होता है. लेकिन जब उन्हें प्रसव के लिए भर्ती कर लिया जाता है तब विभागीय रिकॉर्ड अपडेट करने के लिए आधार कार्ड भी मांगा जाता है.

आधार कार्ड में संबंधित की उम्र का स्पष्ट उल्लेख होता है. प्रसव के लिए आई लड़की की उम्र 21 से कम होने की स्थिति में जिला अस्पताल प्रशासन द्वारा इसकी सूचना संबंधित थानों को कार्यवाही के लिए दी जा रही है. हाल ही में जो मामले सामने आए हैं, उसमें ज्यादातर लड़किया नाबालिग है और मात्र सोलह या सत्रह साल की उम्र में ही मां बन गई है. इसमें चौंकाने वाला मामला यह भी है कि वर्ग विशेष की युवतियां चेहरा ढंक कर ही आती है, जिससे प्रारंभिक दौर में उनकी उम्र का पता नहीं चल पाता है, लेकिन कागजों में उनकी पोलपट्टी सामने आ रही है.

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