लंदन, 12 जुलाई (वार्ता) इंग्लैंड में एक बार फिर ड्यूक्स गेंद चर्चाओं के केंद्र में बनी हुई है, एक बार फिर भारत के दूसरी गेंद लेने के बस 10.3 ओवर बाद ही गेंद ने अपना शेप खो दिया था। जिसके बाद दूसरे दिन सुबह उसे फिर बदला गया।
बदली हुई गेंद से अंतर साफ दिख रहा था, दूसरी नई गेंद से जसप्रीत बुमराह ने कहर बरपाते हुए 14 गेंदों के अंदर तीन विकेट ले लिए थे, लेकिन इसके बाद पूरे सत्र में फिर भारत को विकेट नहीं मिली थी। दूसरी नई गेंद 1.869 डिग्री पर स्विंग हो रही थी जबकि औसतन वह गेंद 0.594 डिग्री पर सीम हो रही थी। लेकिन जब दूसरी नई गेंद को बदला गया तो वह 0.855 डिग्री पर स्विंग हो रही थी और औसतन 0.594 डिग्री ही सीम कर रही थी। जाहिर है इसके बाद भारतीय टीम और कप्तान का गुस्सा बढ़ता जा रहा था।
इंग्लैंड के पूर्व तेज गेंदबाज स्टुअर्ट ब्रॉड ने ब्रॉडकास्ट चैनल के साथ-साथ सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर भी गेंद को लेकर अपनी नाराजगी ज़ाहिर की। ब्रॉड के मुताबिक बदली हुई गेंद देखने में 18-20 ओवर पुरानी दिख रही थी।
“क्रिकेट गेंद बिल्कुल एक विकेटकीपर की तरह होती है जिसकी चर्चा बहुत ही कम की जाती है। लेकिन यहां हम गेंद की लगातार बात कर रहे हैं कि क्योंकि ये एक समस्या बनती जा रही है और हर पारी में करीब-करीब बदली जा रही है। जो कहीं से भी जायज नहीं है, मुझे लगता है पांच सालों से मैं देख रहा हूं कि ड्यूक्स गेंद में समस्या है। जिसे सही करने की जरूरत है, एक गेंद को 80 ओवर चलना चाहिए न कि सिर्फ 10 ओवर।”
एक और पूर्व इंग्लिश कप्तान नासिर हुसैन ने भी कहा, “ड्यूक्स गेंद के साथ गंभीर समस्या है।” लेकिन साथ ही साथ उन्होंने कहा कि गेंदबाज चाहते हैं कि गेंद बिल्कुल परफेक्ट हो और तभी बार-बार गेंद बदल दी जाती है।
“ये भी देखिए कि पहला घंटा बुमराह को खेल पाना बेहद कठिन था। और तभी मैंने देखा कि वे लोग गेंद बदल रहे हैं, मैं ये देखकर हैरान था कि गेंद से जब इतनी मदद मिल रही है तो फिर बदलने की क्या जरूरत। भले ही वह देखने में कैसी लग रही है, शेप कैसा है, इससे क्या मतलब जब गेंदबाज को मदद मिल रही हो ? मुझे लगता है उस समय गेंद को बदलने की मांग करना ही हैरान करने वाला फैसला था।”
2020 से ही ड्यूक्स गेंद सुर्खियां बटोर रही है, लगातार ये गेंद नरम हो जाती है और आकार भी खो देती है। ईसीबी ने भी इसी को देखते हुए काउंटी चैंपियनशिप के चार चरणों में ड्यूक्स की जगह कूकाबुरा गेंद को आजमाया था।
इस सीरीज़ की बात करें तो शुरू से ही दोनों कप्तानों की तरफ से गेंद को लेकर शिकायतें आ रही हैं। गेंद के साथ-साथ पिच ने भी इस सीरीज में कई बार नाटकीय नतीजे सामने लाया है। 31 से 80 ओवर के बीच में इस सीरीज में 86.09 की औसत से विकेट गिरे हैं, जब से हम गेंद दर गेंद कॉमेंट्री कर रहे हैं – इंग्लैंड में ये सर्वाधिक औसत है। सिर्फ इंग्लैंड में ही नहीं अगर ओवरऑल टेस्ट इतिहास की बात करें तो जब से हम गेंद दर दर गेंद कॉमेंट्री कर रहे हैं ये औसत एक टेस्ट सीरीज में तीसरी सर्वाधिक है। इससे ऊपर सिर्फ 2008-09 में श्रीलंका के पाकिस्तान दौरे और 2000-01 में जिम्बाब्वे के न्यूजीलैंड दौरे के दौरान देखने को मिली थी।
