अनूपपुर: जिले में पशु रोगों की जांच और बीमारी का पता लगाने के लिए पशु रोग अन्वेषण प्रयोगशाला की शुरुआत वर्ष 2020 में की गई। करीब 5 वर्ष बीतने के बावजूद आज तक इसका उपयोग नहीं हो पा रहा है और यहां के पशुपालकों को अपने मवेशियों की बीमारी की जांच के लिए परेशान होना पड़ता है। बताया जाता है नियमित रूप से किसी लैब टेक्नीशियन की पदस्थापना न होने से लोगों को जांच के लिए पडोसी जिले शहडोल जाना पड़ता है।
पशुओं में विभिन्न प्रकार की संक्रामक एवं बैक्टीरियल बीमारी, पेट में गड़बड़ी, मूत्र एवं गोबर की जांच तथा विषाणु और जीवाणु से होने वाले 150 तरह की बीमारियों की जांच के लिए पशु जिला चिकित्सालय के समीप ही लैब का निर्माण कराया गया है। इसमें ब्लड एनालाइजर, सेंट्रीयूअल, माइक्रोस्कोप वेइंग मशीन सहित अन्य उपकरण लगाए गए हैं जिससे पशुओं को होने वाले बीमारी की जांच की जा सके।
विभाग ने यहां पर लैब तो बना दिया लेकिन लैब टेक्नीशियन, लैब अटेंडेंट एवं यहां स्वीकृत किए गए कार्यालय सहायक, स्वीपर एवं चिकित्सक के पदों पर आज तक नियुक्ति नहीं हो पाई है। लैब आज तक बंद पड़ा हुआ है। जब कभी भी कोई पशुपालक मवेशी और अन्य पालतू जानवरों की जांच के लिए यहां पहुंचता हैं तो उन्हें यहां ताला लटकता मिलता है।
पेट्स की जांच के लिए परेशान होते हैं लोग
पशु पालक ने बताया कि विदेशी नस्ल का पालतू कुत्ता बीमार हो गया था जिसके पेट में समस्या होने के कारण उसने खाना पीना छोड़ दिया था। अनूपपुर पशु चिकित्सालय लाया गया लेकिन यहां पैथोलॉजी जांच न होने पर शहडोल ले जाना पड़ा। इसी तरह बिजुरी निवासी नीलेश पांडे का विदेशी नस्ल का कुत्ता बीमार हो गया था। उसके पेट में सूजन आ गई थी। चिकित्सक को दिखाया तो पैथोलॉजी जांच के लिए कहा गया.
बिजुरी पशु चिकित्सालय में पता लगाने पर बताया गया कि अनूपपुर में जांच नहीं होती है। शहडोल से ही जांच कराना पड़ेगा। इसके बाद अपने चार पहिया वाहन से शहडोल लेकर जाना पड़ा।वरिष्ठ पशु चिकित्सक अनूपपुर डॉ. योगेश दीक्षित ने बताया कि पशु रोग अन्वेषण प्रयोगशाला में अभी तक कर्मचारियों की पदस्थापना नहीं हुई है, चिकित्सालय के लैब टेक्नीशियन को बुलाकर कार्य लेना पड़ता है। रिक्त पदों की जानकारी वरिष्ठ कार्यालय को भेजी गई लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई है।
