सीधी: हिरन नदी का सीमांकन कार्य अप्रैल 2025 के अंतिम सप्ताह में मात्र दो दिन में पूरा कर लिया गया था, लेकिन प्रतिवेदन सौंपने में दो माह की देरी ने राजस्व विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। कलेक्टर के आदेश और एसडीएम गोपदबनास के निर्देश के बावजूद, राजस्व निरीक्षक सत्यसागर पाण्डेय द्वारा 5 जुलाई 2025 को प्रतिवेदन प्रस्तुत किया गया। जबकि प्रथम टीम ने एक दिन में ही अपना प्रतिवेदन सौंप दिया था।
प्रथम टीम के प्रभारी राजस्व निरीक्षक गांधीग्राम वृत्त सेमरिया थे, जिन्होंने खसरा नं. 738, 648, 220, 66 की नाप की और 21 अतिक्रमणकारी चिन्हित किए। वहीं, दूसरी टीम ने आराजी नं. 247 में केवल 13 अतिक्रमणकारियों को चिन्हित किया था। इस दल में पटवारी सतमन्यु विश्वकर्मा, आशीष मिश्रा और कोटवार भी शामिल थे।
एसडीएम की फटकार के बाद जब प्रतिवेदन प्रस्तुत किया गया, तब यह प्रश्न उठने लगे कि सीमांकन जब दो दिन में हो गया था, तो प्रतिवेदन में दो माह की देरी क्यों? यह देरी अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई को भी प्रभावित कर सकती है।
इनका कहना है
हिरन नदी के सीमांकन हेतु गठित दल द्वारा 28 अप्रैल 2025 को सीमांकन पूर्ण होने पर पंचनामा तैयार कर लिया गया था। मेरे एवं दल के पटवारियों की आवश्यक विभागीय कार्यों की व्यस्तता के कारण प्रतिवेदन उस समय नही जमा हुआ। जहां तक बात प्रतिवेदन में दल में शामिल पटवारियों के हस्ताक्षर नही होने का प्रश्न है तो जिस दिन प्रतिवेदन जमा किये हैं.
उस दिन दल के एक पटवारी सतमन्यू विश्वकर्मा विभागीय कार्य से जबलपुर गये हुये थे एवं दल के एक अन्य पटवारी आशीष मिश्रा उस समय अन्य विभागीय में व्यस्त थे। दल प्रमुख होने के नाते राजस्व निरीक्षक के रूप में मेरे द्वारा प्रतिवेदन जमा कर दिया गया। प्रतिवेदन पंचनामा के आधार पर ही बनता है। पंचनामा में दल में शामिल उक्त दोनों पटवारियों के हस्ताक्षर हैं।
सत्यसागर पाण्डेय, राजस्व निरीक्षक गिर्द -1, गोपद बनास सीधी
