केवडिया (गुजरात), 10 जुलाई (वार्ता) केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने विश्वविद्यालयों में नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) के पूरी तरह से कार्यान्वयन करने के लिए एक रणनीति पत्र तैयार करने का आह्वान किया है।
श्री प्रधान ने गुरुवार को यहां आयोजित केंद्रीय विश्वविद्यालयों कुलपतियों के सम्मेलन कहा कि इस पत्र में बहु-विषयक एकीकरण, भारतीय ज्ञान प्रणाली, कौशल विकास के लिए तकनीकी शिक्षा, नवाचार और परंपरा का टेक्नोलॉजी से एकीकरण जैसी चीजों को शामिल करना होगा।
इस दो दिवसीय सम्मेलन में 50 से अधिक उच्च शिक्षा संस्थानों के कुलपति शामिल हुए हैं। इस आयोजन का उद्देश्य विकसित भारत 2047 के सपने को साकार करने में केंद्रीय विश्वविद्यालयों की भूमिका को रेखांकित करना है। आयोजन के पहले दिन एनईपी 2020 को लागू करने की समीक्षा, मूल्यांकन और रणनीति बनाने पर चर्चा की गई।
केन्द्रीय शिक्षा मंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि पिछले एक दशक में देश के उच्च शिक्षा में खासे बदलाव आए हैं। अब कुल छात्र नामांकन 4.46 करोड़ पर पहुंच गया है। यह 2014-15 की तुलना में 30 फीसदी अधिक है। छात्राओं का नामांकन 38 प्रतिशत बढ़ा है, तो पीएचडी नामांकन लगभग दोगुना हो गया है।
उन्होंने कहा कि 1,200 से अधिक विश्वविद्यालय और 46,000 से अधिक महाविद्यालयों के कारण भारत विश्व स्तर पर सबसे बड़ी शिक्षा प्रणालियों वाला देश बन गया है।
श्री प्रधान ने ज़ोर देकर कहा कि विश्वविद्यालयों को “छात्र-प्रथम” दृष्टिकोण अपनाना चाहिए। छात्र सभी सुधारों का केंद्र हों क्योंकि वे हमारे भविष्य के लिए सबसे महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने कुलपतियों से यह सुनिश्चित करने का आह्वान किया कि नए बनने वाले संस्थानों में कुशल और भविष्य को बढ़ावा देने वाला कार्यबल और छात्र हों। छात्रों को नौकरी देने वाला, सामाजिक उद्यमी जैसी बातों के लिए सशक्त बनाया जाए।
सम्मेलन में उच्च शिक्षा को सशक्त बनाने के लिए शिक्षण, कौशल विकास, डिजिटल शिक्षा, विश्वविद्यालय प्रशासन प्रणाली, समानता और भारतीय ज्ञान प्रणालियों के एकीकरण पर केंद्रित छह विषयगत सत्रों पर चर्चा होना तय है।
