नयी दिल्ली 10 जुलाई (वाता) उप राष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने देश को विकसित बनाने में उद्योगों की भूमिका पर बल देते हुए निजी क्षेत्र से देश के भविष्य के लिए सह-निर्माता बनकर काम करने का आह्वान किया है।
उप राष्ट्रपति ने गुरूवार को यहां भारतीय उद्योग परिसंघ और आईटीसी के पुरस्कार वितरण समारोह में उद्योग की भूमिका पर बल देते हुए कहा, “निजी क्षेत्र को केवल आर्थिक गतिविधियों तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि भारत के भविष्य का सह-निर्माता बनकर काम करना चाहिए। हम केवल लाभ के लिए काम नहीं करते, हम अपनी सामूहिक ऊर्जा को समाज की भलाई के लिए लगाने में विश्वास करते हैं। एक सच्चे विकसित राष्ट्र में अवसर केवल कुछ लोगों का विशेषाधिकार नहीं बल्कि सभी का अधिकार होता है।”
उपराष्ट्रपति ने उद्योग जगत से समावेशी दृष्टिकोण अपनाने का आग्रह करते हुए कहा कि उसे सूक्ष्म,लघु और मध्यम उद्यमों को समर्थन देने के साथ साथ नेतृत्व में लैंगिक तथा जातीय संतुलन को भी प्रोत्साहित करना चाहिए। उन्होंने कहा कि लैंगिक और जातीय विविधता को सही मायनों में समझना होगा।
भारत के सतत विकास के दृष्टिकोण पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि भारत मानवता का छठा हिस्सा है, दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था हैं और एक ऐसे विकास मॉडल के वाहक हैं जो अर्थव्यवस्था, पारिस्थितिकी और नैतिकता को संतुलित करता है। उन्होंने कहा कि वैश्विक 2030 सतत विकास एजेंडा भारत की सक्रिय भागीदारी के बिना सफल नहीं हो सकता। उन्होंने कहा कि भारत की नेतृत्व दृष्टि ने इस जिम्मेदारी को स्पष्टता और दृढ़ संकल्प के साथ अपनाया है। उन्होंने कहा , “ हम उद्देश्य के साथ समृद्धि, समावेशन के साथ विकास, और ईमानदारी के साथ नवाचार चाहते हैं। भारतीय उद्योग को इस हरित क्रांति का अग्रदूत बनना चाहिए—नवीकरणीय ऊर्जा, हरित हाइड्रोजन, परिपत्र अर्थव्यवस्था मॉडल, और कार्बन बाजारों में निवेश करें। अगर हम सततता को केवल अनुपालन के रूप में देखें, तो हम यह लड़ाई पहले ही हार चुके होंगे।”
उद्योगपतियों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा,“भारतीय उद्योग को अब न केवल वैश्विक बाजारों में बल्कि विचारों, मानकों और समाधानों में भी अपनी उपस्थिति दर्ज करानी चाहिए। ‘ब्रांड इंडिया’ को चार स्तंभों गुणवत्ता, भरोसा, नवाचार, और आधुनिकता में पुनर्परिभाषित प्राचीन ज्ञान पर आगे बढाया जाना चाहिए। ”
उन्होंने कहा, “एक समय था जब स्वास्थ्य और शिक्षा क्षेत्र को व्यवसायियों द्वारा समाज को वापस देने का माध्यम माना जाता था। लेकिन अब ये क्षेत्र लाभ का साधन बनते जा रहे हैं। इन क्षेत्रों का व्यवसायीकरण और वस्तुवादीकरण जो समाज सेवा के माध्यम होने चाहिए थे, चिंता का विषय है। इसलिए मैं चाहता हूँ कि सीआईआई एक ऐसी व्यावसायिक संस्कृति को बढ़ावा दे जो समता, पारदर्शिता और दीर्घकालिक मूल्य निर्माण को प्राथमिकता दे।”
निजी क्षेत्र की भूमिका पर बल देते हुए उप राष्ट्रपति ने कहा, “सरकार की भूमिका केवल एक सक्षमकर्ता की है। असली ज़िम्मेदारी कॉर्पोरेट क्षेत्र पर है। सरकार अकेले ‘पेनल्टी गोल’ नहीं कर सकती, न ही वह अकेले ‘कॉर्नर किक’ को गोल में बदल सकती है। नवाचार, रोजगार सृजन और राष्ट्रीय विकास की संरचना में उद्योग की निर्णायक भूमिका है। जब मैं वैश्विक दृष्टिकोण से कॉर्पोरेट भारत को देखता हूं, तो यह प्रतिभा का अनमोल भंडार और समाज के प्रति प्रतिबद्धता का प्रतीक है। इसका सरकार के साथ समन्वय एक अभूतपूर्व परिवर्तन ला सकता है।”
श्री धनखड़ ने कहा, “भारत सरकार अब केवल ‘सरकार केंद्रित दृष्टिकोण’ से आगे बढ़ चुकी है। अब ‘समाज समग्र दृष्टिकोण’ अपनाया गया है, जिसमें राज्य सरकारें, स्थानीय निकाय, सिविल सोसायटी, निजी क्षेत्र और समुदाय सभी महत्वपूर्ण कड़ी हैं। लेकिन इस प्रगति के इंजन को सभी सिलिंडरों पर चलाना होगा, तभी हम वास्तविक सफलता प्राप्त कर सकते हैं।”
