ऐसा व्यंग्यकार हिन्दी कहानी में कोई और नहीं

सतना: मप्र हिन्दी साहित्य सम्मेलन भोपाल व जिला इकाई सतना द्वारा हिन्दी सहित्य सम्मेलन का आयोजन 5 जुलाई को अमौधा कला सतना के विट्स कॉलेज में किया गया है। कथा के यथार्थ लोक में अमरकांत व जन्मशती विमर्श के इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि सुप्रतिष्ठित आलोचक, संपादक एवं अनुवादक संजीव कुमार रहे। अध्यक्षता ख्यातिलब्ध कलाकार महेश कटारे ने की।

जाने माने साहित्यकार व लेखक प्रहलाद अग्रवाल, राजीव कुमार शुक्ल, डॉ. सत्येन्द्र शर्मा, सुषमा मुनीन्द्र, सपना सिंह, डॉ. दिव्या जैन धवन भी परिचर्चा में शामिल हुए। कार्यक्रम का संचालन वन्दना अवस्थी दुबे, अमित शुक्ला, शुभम बारी ने और साहित्य मंत्री डॉ. श्रद्धा श्रीवास्त ने विमर्श का संचालन किया। इस आयोजन में मप्र हिन्दी साहित्य सम्मेलन भोपाल के अध्यक्ष पलाश सुरजन, महामंत्री अभिषेक वर्मा, जिला इकाई सतना के सचिव श्रीश पांडेय मौजूद रहेे।
बघेली लोकगीत से शुरुआत
आकार वेलफेयर सोसायटी ने इस आयोजन की शुरूआत में बघेली लोकगीत प्रस्तुत किए। भईया आपन दिन्ही खड़ाऊं… पुनि पुनि पूजत माथ चढ़ाऊं। जिस निंदा में सोए रहो… ओ भोले बाबा सुन लेया बिनती हमार।बघेली दादरा… अइसन मिजाजी ताल गगरिया बूड़त नाहीं…। छाई कारौंदा बहार… बहार मोरे रामा… जैसे गीतों से श्रोताओं का मन मोह लिया। इसके बाद सोसयटी के सदस्यों ने एक थी गौरा का नाट्य मंचन किया। जिसमें आकार कुशवाहा, रुपाली कृष्णानी, पूजा विश्वकर्मा, अनुराग श्रीवास्तव, सागर सेन, अयांश श्रीवास्तव, सावित्री, अमित शुक्ल ने अभिनय किया।
स्मारिका का विमोचन
मुख्य विमर्श की शुरूआत में अतिथियों ने कथा के यथार्थ लोक में अमरकांत की स्मारिका का विमोचन किया।

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