भोपाल। मुनि श्री प्रमाणसागर महाराज ने 1100 क्वार्टर, अरेरा कॉलोनी में कहा कि जीवन को बहुआयामी बनाना है तो विश्लेषण करें, पर अतिविश्लेषण से बचें। उन्होंने उदाहरण देकर बताया कि घटनाएं एक जैसी होती हैं, लेकिन उनका उपयोग और दृष्टिकोण व्यक्ति विशेष पर निर्भर होता है। जैसे दूध से नवनीत निकलता है, पर अधिक मंथन से वह खराब हो सकता है। उन्होंने आह्वान किया कि व्यक्ति अपने विचारों का मंथन करे, व्यर्थ विचारों को छोड़े और आत्महित का मूल्यांकन करता रहे। प्रवक्ता अविनाश जैन ने बताया कि चातुर्मास कलश स्थापना 13 जुलाई को अवधपुरी स्थित विद्या प्रमाण गुरुकुलम् में होगी।
जीवन को बहुआयामी बनाना है तो करें विश्लेषण, पर अति विश्लेषण से बचें
