
सतना। जिला पंचायत के निर्वाचित जनप्रतिनिधियों के अधिकारों के संरक्षण और प्रशासनिक व्यवस्थाओं से नाराज सदस्यों पदाधिकारी ने तालाबंदी का एलान कलेक्टर के साथ हुई बैठक के बाद नरम पड़ गया.हालांकि इसके पहले जिला पंचायत कार्यालय के सामने धरना प्रदर्शन क्रम सुबह 11 बजे शुरू होकर दोपहर तीन बजे तक चार घण्टे तक चला.
इस दौरान जिला पंचायत कार्यालय को बेरिकेट लगाकर पुलिस छावनी में तब्दील कर दिया गया था.पुलिस प्रशासन तालाबंदी रोकने के लिए पूरे समय मुस्तैद रही। आंदोलन में जिला पंचायत उपाध्यक्ष सुष्मिता पंकज सिंह परिहार के साथ जिला पंचायत सभापति ज्ञानेन्द्र सिंह ज्ञानू, धर्मेन्द्र सिंह बराज, संजय सिंह, आरती चौधरी, रमाकांत पयासी, सुभाष बुनकर मुख्य रूप से धरना मंच पर मौजूद रहे। दोपहर करीब ढाई बजे एसडीएम राहुल सिलाडिया, सीएसपी देवेन्द्र प्रताप सिंह चौहान, टीआई सिटी कोतवाली रावेन्द्र द्विवेदी, टीआई कोलगवां सुदीप सोनी, टीआई थाना सिविल लाइन योगेन्द्र सिंह परिहार की मौजूदगी में प्रदर्शन करने वाले से चर्चा की गई। इस दौरान यह बात बनी की कलेक्टर के साथ एक बैठक के बाद ही प्रदर्शनकारी कोई निर्णय लें। सभापति ज्ञानेन्द्र सिंह ज्ञानू ने बताया कि कलेक्टर डॉ. सतीश कुमार की दो दौर की वार्ता में सभी अहम मुद्दे रखे गए। इसके बाद तय हुआ कि 11 जुलाई को प्रशासन और जिला पंचायत सदस्यों की मौजूदगी में अहम बैठक होगी। जिसमें सभी समस्याओं का निराकरण किया जाएगा। कलेक्टर ने यह भी कहा कि तालाबंदी की नौबत क्यों आई इसकी समीक्षा करेंगे।
अध्यक्ष शामिल नहीं हुए
तालाबंदी के पहले हुए इस धरना प्रदर्शन में जिला पंचायत अध्यक्ष राम खेलावन कोल समेत 7 सदस्य शामिल नहीं हुए। प्रदर्शन करने वालों की नाराजगी जिला पंचायत सीईओ संजना जैन के प्रति रही। अब 11 जुलाई की समन्वय बैठक में आगे की कार्ययोजना तय होगी।
धरना स्थल में हुई सभा
आंदोलन रत जिला पंचायत के सदस्य और अन्य पंचायत प्रतिनिधियों ने धरना स्थल में सभा को सम्बोधित कर जिला पंचायत की गतिविधियों की खुलकर आलोचना की .उनका कहना था कि जिला पंचायत में बहुत ज्यादा भ्र्ष्टाचार है. शासन की मंशा के विपरीत काम करके केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं को अधिकारी कमर्चारी पलीता लगा रहे हैं.
