नयी दिल्ली,02 जुलाइ्र (वार्ता) इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (आईसीएमआर) और अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के संयुक्त अध्ययन के आधार पर दावा किया गया है कि देश में हो रहीं अचानक मौतों की वजह कोरोना वैक्सीन नहीं है।
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने भी इस बात की पुष्टि की है कि कोरोना वैक्सीन और युवाओं में दिल का दौरा पड़ने में कोई संबंध नहीं है।
कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्दारमैया द्वारा हासन जिले में दिल का दौरा पड़ने से हुई मौतों को कोविड वैक्सीन का कारण बताया गया। इसके एक दिन बाद बुधवार को केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने उनके दावों का खंडन करते हुए कहा कि आईसीएमआर और एम्स द्वारा किए गए व्यापक अध्ययनों में इस तरह के कोई संबंध नहीं पाए गए हैं।
श्री सिद्दारमैया ने कल कहा था कि कोविड वैक्सीन को जनता के लिए ‘जल्दबाजी में मंजूरी और वितरण’ भी इन मौतों का एक कारण हो सकता है और उन्होंने सभी से आग्रह किया कि अगर उन्हें सीने में दर्द या सांस लेने में कठिनाई जैसे लक्षण दिखाई दें तो वे तुरंत नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र पर जाकर जांच कराएं। इन संकेतों को नज़रअंदाज़ न करें।
मंत्रालय ने हालांकि उनकी टिप्पणी को खारिज करते हुए कहा कि देश में कई एजेंसियों के माध्यम से अचानक हुई मौतों के मामले की जांच की गई है और इन अध्ययनों ने निर्णायक रूप से स्थापित किया है कि कोविड-19 टीकाकरण और अचानक मौतों की रिपोर्ट के बीच कोई सीधा संबंध नहीं है।
मंत्रालय ने आईसीएमआर और राष्ट्रीय रोग नियंत्रण केंद्र (एनसीडीसी) द्वारा किए गए अध्ययनों का हवाला देते हुए कहा कि उन्होंने पुष्टि की है कि देश में कोविड-19 के टीके सुरक्षित और प्रभावी हैं, जिनमें गंभीर दुष्प्रभावों के बहुत कम मामले सामने आए हैं। बयान में कहा कि अचानक हृदय संबंधी मौतें कई तरह के कारकों के कारण हो सकती हैं, जिनमें आनुवंशिकी, जीवनशैली, पहले से मौजूद बीमारियां और कोविड के बाद की जटिलताएं शामिल हैं।
आईसीएमआर और एनसीडीसी अचानक होने वाली मौतों खासकर 18 से 45 वर्ष की आयु के युवाओं के पीछे के कारणों को समझने के लिए मिलकर काम कर रहे हैं। इसका पता लगाने के लिए, अलग-अलग शोध दृष्टिकोणों का उपयोग करके दो पूरक अध्ययन किए गए।
बयान में कहा गया है कि पहला अध्ययन आईसीएमआर के राष्ट्रीय महामारी विज्ञान संस्थान (एनआईई) द्वारा किया गया था, जिसका शीर्षक ‘भारत में 18-45 वर्ष की आयु के वयस्कों में अचानक होने वाली मौतों से जुड़े कारक – एक बहु-केंद्रित मिलान केस नियंत्रण अध्ययन,’ था। मई से अगस्त 2023 तक 19 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के 47 देखभाल अस्पतालों में किया गया।
मंत्रालय ने कहा कि इसमें ऐसे व्यक्तियों पर अध्ययन किया गया जो स्वस्थ प्रतीत होते थे, लेकिन अक्टूबर 2021 और मार्च 2023 के बीच अचानक उनकी मृत्यु हो गई। निष्कर्षों से पता चला है कि कोविड-19 टीकाकरण से युवा वयस्कों में अचानक मृत्यु का जोखिम नहीं बढ़ता है।
अध्ययन के मुताबकि अधिकांश अस्पष्टीकृत मृत्यु मामलों में आनुवंशिक परिवर्तन को इन मौतों के संभावित कारण माना जा रहा है। अध्ययन पूरा होने के बाद अंतिम परिणाम साझा किए जाएंगे। साथ में, ये दोनों अध्ययन देश में युवा वयस्कों में अचानक होने वाली मौतों के बारे में अधिक जानकारी प्रदान करते हैं। बयान में कहा गया है कि यह भी पाया गया है कि कोविड-19 टीकाकरण से जोखिम नहीं बढ़ता है, जबकि स्वास्थ्य समस्याओं, आनुवंशिक प्रवृत्ति और जोखिम भरी जीवनशैली विकल्पों की भूमिका अस्पष्टीकृत मौतों का कारण हो सकती है।
कर्नाटक के मुख्यमंत्री ने टीके की प्रभावशीलता पर संदेह संबंधी बयान में किसी का नाम लिए बिना कहा, “वैज्ञानिक विशेषज्ञों ने दोहराया है कि कोविड टीकाकरण को अचानक मौतों से जोड़ने वाले बयान झूठे और भ्रामक हैं, और वैज्ञानिक में आम सहमति नहीं हैं।”
मंत्रालय ने कहा,“निर्णायक साक्ष्य के बिना अटकलें लगाने वाले दावों से टीकों में जनता का भरोसा कम होने का जोखिम है, जिसने महामारी के दौरान लाखों लोगों की जान बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इस तरह की निराधार रिपोर्ट और दावे देश में वैक्सीन के प्रति हिचकिचाहट को बढ़ा सकते हैं, जिससे सार्वजनिक स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।”
श्री सिद्दारमैया ने कहा कि पिछले महीने में हासन जिले में ही दिल के दौरे से 20 से ज़्यादा लोगों की मौत हुई थी। मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया ‘एक्स’ पर एक पोस्ट लिखा, “सरकार इस मामले को बहुत गंभीरता से ले रही है। इन मौतों के सटीक कारण की जानने और समाधान खोजने के लिए जयदेव इंस्टीट्यूट ऑफ़ कार्डियोवैस्कुलर साइंसेज एंड रिसर्च के निदेशक डॉ. रवींद्रनाथ के नेतृत्व में विशेषज्ञों की एक समिति बनाई गई है और उन्हें 10 दिनों के अंदर अध्ययन संबंधि रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया गया है।”
